जैविक कृषि सुरक्षा

सहफसली खेती से सुधरेगी मिट्टी की सेहत

सहफसली खेती से सुधर रही मिट्टी की सेहत
मिट्टी की उर्वरा शक्ति  और उत्पादन में चोली-दामन का संबंध है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के अनुसार ही उसकी उत्पादन क्षमता प्रभवित होती है। अगर खेतों में सहफसली कृषि की जाए तो मिट्टी की सेहत के साथ-साथ उत्पादन भी बेहतर हो जाता है।

स्टिकी ट्रैप

किसान घातक कीटनाशकों के छिड़काव के बिना कीटों से अपनी फसल की रक्षा कर सकेंगे। रासायनिक दवाओं से कीट नियंत्रण में कई तरह की दिक्कत आती हैं, जिसमें कृषि पर्यावरण को कई तरह के नुकसान शामिल रहते हैं। जबकि स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से किसान इन सभी दिक्कतों से बच सकता है। रासायनिक कीटनाशकों के लगातार इस्तेमाल से कई गंभीर खतरे पैदा होतेे रहते हैं। रसायन के ज्यादा इस्तेमाल से कीटों में रसायन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, खाद्य शृंखला में कीटनाशक अवशेष, मृदा प्रदूषण, मित्र कीटों का अनचाहा नुकसान और पर्यावरण को कई अन्य नुकसान भी होते हैं।बार बार रासायनिक कीटनाशको के प्रयोग के उपरांत भी कपास, मूंगफली, धान

कृषि और खाद्य उत्पादकता में बहुत सहयोग करती हैं मधुमक्खियां

मधुमक्खी कीट वर्ग का प्राणी है। मधुमक्खी से मधु प्राप्त होता है जो अत्यन्त पौष्टिक भोजन है। यह संघ बनाकर रहती हैं। प्रत्येक संघ में एक रानी, कई सौ नर और शेष श्रमिक होते हैं। मधुमक्खियाँ छत्ते बनाकर रहती हैं। इनका यह घोसला (छत्ता) मोम से बनता है।

वानस्पतिक रसायन एवं उनका प्रयोग

वानस्पतिक रसायनों से कीट नियंत्रण
वातावरण में बढ़ते प्रदूषण तथा कीटनाशकों के मूल्यों में भारी वृद्धि के कारण यह आवश्यक हो गया है कि कीटों के नियंत्रण हेतु वानस्पतिक नियंत्रण की विधियों को प्रयोग में लाया जाये। वानस्पतिक विधियों के प्रयोग से किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। इस विधि से कीट नियंत्रण में खर्च कम आता है। इन विधियों में निम्न वनस्पतियों का प्रयोग किया जाता है।
1. नीम से कीट नियन्त्रण

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