जैविक कृषि सुरक्षा

एग्रो-केमिकल्स या कृषि रसायन क्या हैं?

एग्रो-केमिकल्स  या कृषि रसायन ऐसे उत्पादों की श्रेणी है जिसमें सभी कीटनाशक रसायन एवं रासायनिक उर्वरक शामिल होते हैं. यद्यपि ये सभी रसायन किसानों के लिए अत्यंत महंगे हैं फिर भी बेहतर उत्पादन हेतु इनका उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. यदि इनका उपयोग सही मात्रा एवं उपयुक्त विधि द्वारा किया जाए तो ये किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर प्रदान कर सकते हैं. रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की प्रकृति और स्थानीय वातावरण पर निर्भर करता है.

ऐसे बनाएं सब्जी बगीचा ( किचन गार्डन )

साग-सब्जियों का हमारे दैनिक भोजन में महत्वपूर्ण स्थान है. विशेषकर शाकाहारियों के जीवन में. साग-सब्जी भोजन में ऐसे पोषक तत्वों के स्नेत हैं, हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं बढ़ाते, बल्कि उसके स्वाद को भी बढ़ाते हैं. पोषाहार विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित भोजन के लिए एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 85 ग्राम फल और 300 ग्राम साग-सब्जियों का सेवन करना चाहिए, परंतु हमारे देश में साग-सब्जियों का वर्तमान उत्पादन स्तर प्रतिदिन, प्रतिव्यक्ति की खपत के हिसाब से मात्र 120 ग्राम है. इसलिए हमें इनका उत्पादन बढ़ाना चाहिए.

ब्जी बगीचा के लिए स्थल चयन

बीज का महत्व

भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था में कृषि रीढ़ की हड्डी के समान है । हमारे देश प्रदेश में हमारी आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है । हमेशा से और आज भी कृषि उत्पादन में बीजों की भूमिका अत्याधिक महत्वपूर्ण रही है। बीज खेती की नींव का आधार और मूलमंत्र है। अत: अच्छी गुणवत्ता वाले बीज से, फसलों का भरपूर उत्पादन प्राप्त होता है।

रामतिल की उन्नत खेती

जगनी के नाम से आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्रों में पहचानी जाने वाली फसल रामतिल है। मध्‍यप्रदेश में इसकी खेती लगभग 220 हजार हेक्‍टेयर भूमि में की जाती है तथा उपज 44 हजार टन मिलती है। प्रदेश में देश के अन्‍य उत्‍पादक प्रदेशों की तुलना में औसत उपज अत्‍यंत कम (198 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर ) है। मध्‍यप्रदेश में इसकी खेती प्रधान रूप से छिंदवाडा , बैतूल, मंडला, सिवनी, डिन्‍डौरी एवं शहड़ोल जिलों में की जाती है।

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