जैविक कृषि सुरक्षा

रामतिल की उन्नत खेती

जगनी के नाम से आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्रों में पहचानी जाने वाली फसल रामतिल है। मध्‍यप्रदेश में इसकी खेती लगभग 220 हजार हेक्‍टेयर भूमि में की जाती है तथा उपज 44 हजार टन मिलती है। प्रदेश में देश के अन्‍य उत्‍पादक प्रदेशों की तुलना में औसत उपज अत्‍यंत कम (198 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर ) है। मध्‍यप्रदेश में इसकी खेती प्रधान रूप से छिंदवाडा , बैतूल, मंडला, सिवनी, डिन्‍डौरी एवं शहड़ोल जिलों में की जाती है।

सूत्रकृमि फसलों पर अदृश्य खतरा

फसलों में बहुत से ऐसे कीड़े लगते हैं जो उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। जिन्हें हम आंखों से देखने में समर्थ होते हैं उनकी रोकथाम मुमकिन है लेकिन किसान द्वारा मेहनत से उगाई गई फसल के लिए कई ऐसे शत्रु भी हैं जो आंखों से नहीं दिखाई देते हैं, उनसे निपटना ज्यादा मुश्किल होता है।

इन्हें केवल माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। 95 फीसदी किसानों को इसके विषय में कोई जानकारी नहीं होती है। ऐसे अज्ञात शत्रु बरसों से फसलों को नुकसान पहुंचाते आ रहे हैं। इन्हें सूत्रकृमि कहते हैं। जड़ों को भेदकर उनमें गांठ बनाने वाले सूत्रकृमियों की संख्या कई लाख होती है। 

अमरूद की ये नई किस्में देंगी 25 साल तक फल

अमरूद की खेती

बरसात का मौसम बागवानी के लिए अच्छा माना जाता है। इस समय अमरूद की बागवानी की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिकों ने अमरूद की कुछ नई किस्म तैयार की है, जो एक बार लगाने के 25 साल तक फलते रहेंगे। 

बनाया जा सकता है "हवा उर्वरक" र्हिज़ोबियम

कृषि उत्पादन में, फसल की उपज पर नाइट्रोजन उर्वरक के स्तर पर एक बड़ी भूमिका निभाता है। लोग हवा से अधिक 5,000 टन को रोकने के लिए जमीन का एक एकड़ से अधिक एक बहुत अमीर नाइट्रोजन (हवा सामग्री के बारे में 4/5), जिसमें पता है। दुर्भाग्य से, नाइट्रोजन की इतनी बड़ी राशि, फसलों सीधे अवशोषित और उपयोग नहीं किया जा सकता है। rhizobia साथ फली सहजीवन वहाँ हवा में नाइट्रोजन के अणुओं पर कब्जा कर सकते हैं एक विशेष करने की क्षमता है, और यह नाइट्रोजन उर्वरक संयंत्र का एक बहुत प्रदान करने के लिए, अमोनिया और hydrazine के लिए तय हो गई है।

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