मसाले

भोजन को सुवास बनाने, रंगने या संरक्षित करने के उद्देश्य से उसमें मिलाए जाने वाले सूखे बीज, फल, जड़, छाल, या सब्जियों को 'मसाला (spice) कहते हैं। कभी-कभी मसाले का प्रयोग दूसरे फ्लेवर को छुपाने के लिए भी किया जाता है।

मसाले, जड़ी-बूटियों से अलग हैं। पत्तेदार हरे पौधों के विभिन्न भागों को जड़ी-बूटी (हर्ब) कहते हैं। इनका भी उपयोग फ्लेवर देने या अलंकृत करने (garnish) के लिए किया जाता है।

बहुत से मसालों में सूक्ष्मजीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।

सौंफ़ की उन्नत खेती

सौंफ का वानस्पतिक नाम है Foeniculum vulgare । यह व्यावसायिक रूप से एक वार्षिक जड़ी बूटी के रूप में खेती की जाती है, जो एक मोटा और सुगंधित मसाला फसल है। सौंफ़ देश के विभिन्न भागों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। हिंदी में, सौंफ 'saunf' के रूप में जाना जाता है और तमिल में यह perungeerakam 'के रूप में जाना जाता है। भारत में सौंफ के प्रमुख उत्पादन केन्द्रों राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा रहे हैं।

तेजपत्ता ( दालचीनी) की जैविक उन्नत खेती

Kisanhelp.in खेती और कृषि मुद्दों से संबंधित मुद्दों का सामना कर रहे किसानों को कृषि तकनीक को समझने में किसानों की मदद करने वाली वेबसाइट हैं ।

वैज्ञानिक नाम

 

सिनामोममतमाला

 

 कुल

लोरेसी

अन्य नाम

 

दालचीनी, तमालका, इंडियन केसिया

प्राप्ति स्थान

 

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश

पादप परिचय

 

यह एक सीधा बहुवर्षिय पेड़ होता है इसके पेड़ 100 वर्षो तक उपज देते हैं तथा लागत कम लगा कर अच्छा लाभ मिलता है।

हल्दी की उन्नत जैविक खेती

हल्दी जिंजिवरेंसी कुल का पौधा हैं। इसका का वानस्पतिक नाम कुर्कमा लांगा हैं। इसकी उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया में हुई हैं। हल्दी का उपयोग प्राचीनकाल से विभिन्न रूपों में किया जाता आ रहा हैं, क्योंकि इसमें रंग महक एवं औषधीय गुण पाये जाते हैं। हल्दी में जैव संरक्षण एवं जैव विनाश दोनों ही गुण विद्यमान हैं, क्योंकि यह तंतुओं की सुरक्षा एवं जीवाणु (वैक्टीरिया) को मारता है। इसका उपयोग औषधीय रूप में होने के साथ-साथ समाज में सभी शुभकार्यों में इसका उपयोग बहुत प्राचीनकाल से हो रहा है। वर्तमान समय में प्रसाधन के सर्वोत्तम उत्पाद हल्दी से ही बनाये जा रहे हैं। हल्दी में कुर्कमिन पाया जाता हैं तथा इससे ए

जीरा की उन्नत खेती

जीरा का वानस्पतिक नाम है Cuminum cyminum । भारत में यह 'जीरा' या हिंदी में 'Zeera' के रूप में जाना जाता है। यह विभिन्न खाद्य तैयारी स्वादिष्ट बनाने के लिए भारतीय रसोई में इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण मसाला है। जीरा का स्वाद एक वाष्पशील तेल की उपस्थिति की वजह से है। जीरा के स्वदेशी किस्मों में, इस वाष्पशील तेल 2.5-3.5% तक मौजूद है। जीरा बड़े पैमाने पर भी विशेष रूप से मोटापा, पेट दर्द और dyspesia जैसी स्थितियों के लिए विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।17.7% प्रोटीन, 23.8% वसा, 35.5% कार्बोहाइड्रेट और 7.7% खनिज इस प्रकार है: जीरा के पोषण का महत्व है।

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