मसाले

भोजन को सुवास बनाने, रंगने या संरक्षित करने के उद्देश्य से उसमें मिलाए जाने वाले सूखे बीज, फल, जड़, छाल, या सब्जियों को 'मसाला (spice) कहते हैं। कभी-कभी मसाले का प्रयोग दूसरे फ्लेवर को छुपाने के लिए भी किया जाता है।

मसाले, जड़ी-बूटियों से अलग हैं। पत्तेदार हरे पौधों के विभिन्न भागों को जड़ी-बूटी (हर्ब) कहते हैं। इनका भी उपयोग फ्लेवर देने या अलंकृत करने (garnish) के लिए किया जाता है।

बहुत से मसालों में सूक्ष्मजीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।

दालचीनी खेती एक लाभकारी खेती

दालचीनी का वानस्पतिक नाम है सिनामोन verum और यह एक मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है सूखे भीतरी छाल, जिनमें से एक सदाबहार पेड़ है। दालचीनी के पेड़ पूर्ण विकास पर 6-15 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच है कि मध्यम लंबा पेड़ हैं। दालचीनी अति प्राचीन काल से कारोबार किया गया है कि सबसे पुराना ज्ञात मसालों में से एक है। दालचीनी स्वाभाविक रूप से पश्चिमी घाट के जंगलों में देखा है और व्यावसायिक रूप से केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में खेती की जाती है।

काली मिर्च की खेती

वानस्पतिक विशेषताओं

काली मिर्च के पौधे एक सदाबहार बारहमासी है । यह हवाई जड़ों के माध्यम से पेड़ या trellises को ही देता है और एक परजीवी संयंत्र नहीं है।
पत्ते आयताकार हैं , नोक पर इशारा किया और बारी-बारी से व्यवस्था की।
काली मिर्च के पौधों को एक उथले जड़ प्रणाली है। 2 मीटर की गहराई तक मिट्टी घुसना कर सकते हैं कि कुछ प्रमुख पार्श्व जड़ों वहां आम तौर पर कर रहे हैं।
सफेद फूल मिनट और मुख्य रूप से उभयलिंगी (एक फूल में दोनों लिंगों ) कर रहे हैं ।

जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता

काली मिर्च की खेती

मूल स्थान तथा उत्पादक देश

काली मिर्च के पौधे का मूल स्थान दक्षिण भारत ही माना जाता है। भारत से बाहर इंडोनेशिया, बोर्नियो, इंडोचीन, मलय, लंका और स्याम इत्यादि देशों में भी इसकी खेती की जाती है। विश्वप्रसिद्ध भारतीय गरम मसाले में, ऐतिहासिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से, काली मिर्च का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका वर्णन और उपयोग प्राचीन काल से चला आ रहा है। ग्रीस, रोम, पुर्तगाल इत्यादि संसार के विभिन्न देशों के सहस्रों वर्ष पुराने इतिहास में भी इसका वर्णन मिलता है।

हल्दी की खेती के बारे में पूछे जाने बाले प्रमुख प्रश्न

हल्दी मसाले वाली फसलो में बहुत ही महत्वपूर्ण है, इसकी खेती भारतवर्ष में सबसे अधिक की जाती हैI मुख्यरूप से इसकी खेती आँध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल एवं कर्नाटक में अधिक की जाती हैI

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