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कृषि में करियर के हैं अवसर

कृषि में करियर के हैं अवसर

पशु वैज्ञानिक मांस, मछली तथा डेयरी उत्पादों के उत्पादन तथा प्रसंस्करण में सुधार लाने के अनुसंधान कार्य करते हैं। वे पालतू बनाए गए फार्म पशुओं, आनुवंशिक, पोषण, पुनर्जनन, वर्धन तथा विकास का अध्ययन करने के लिए जैवप्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हैं। कुछ पशुवैज्ञानिक पशुधन खाद्य उत्पादों का निरीक्षण तथा श्रेणीकरण करते हैं, पशुधन खरीदते हैं या तकनीकी बिव्री अथवा विपणन में कार्यरत हैं। विस्तार एजेंटों वैतनिक या सलाहकार के रूप में पशु वैज्ञानिक कृषि-उत्पादकों को पशु आवासन सुविधाओं को उपयुक्त रूप से बढ़ाने, अपने पशुओं की मृत्यु-दर कम करने, अपशिष्ट पदार्थों के उपयुक्त रूप से हस्तन या दूध या अंडों जैसे प

मानसून की मोहताज अर्थव्यवस्था

मानसून की मोहताज अर्थव्यवस्था

अलनीनो के कारण वैश्विक वर्षा क्षेत्र अस्त-व्यस्त होने से भारत के मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस समय जहाँ एक ओर देश के किसान लगातार मौसम की खराबी का ख़ामियाज़ा भुगतते-भुगतते हताश दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडीओ) के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियन वेदर ब्यूरो (एडबल्यूबी) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि अलनीनो के भारत आने की आशंका सामान्य से तीन गुना ज्यादा है। अलनीनो के कारण दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान भारत में होने वाली बारिश सामान्य की तुलना में 93 फीसद रह सकती है। वस्तुत: अलनीनो उस समुद्री घटना का नाम है जब प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के अत्यधिक गर

जनसंख्या के बढ़ते बोझ को भोजन उपलब्ध कराने ऊपरी व शुष्क भूमि की उपयोगिता बढ़ाना है जरूरी

जनसंख्या के बढ़ते बोझ को भोजन उपलब्ध कराने ऊपरी व शुष्क भूमि की उपयोगिता बढ़ाना है जरूरी

वैज्ञानिकों में भ्रम है कि हम उन्नत तकनीक की बात कर रहे हैं, तो पूर्व की परिस्थिति में ही सिर्फ निचली व मध्यम भूमि की उपयोगिता से काम चल जायेगा. लेकिन नयी परिस्थितियों में ऊपरी भूमि का उपयोग बढ़ाना जरूरी है. 

चलें खेत की ओर

चलें खेत की ओर

अब हम ग्रामीण युवाओं की बात करते हैं। यदि इन्हें बुद्धि व विज्ञान से कृषि कार्य सिखाया जाए तो यह अपनी 2-3 एकड़ जमीन से भी सम्मान पूर्वक जीवन जीने योग्य अपने को बना सकते हैं और हम सारी दुनिया का पेट भर सकते हैं। हम अपने देश को कृषि प्रधान देश कहते हैं, परन्तु इसका वास्तविक मतलब हमें मालूम ही नहीं है। विश्व में केवल 20 प्रतिशत जमीन पर खेती होती है। हमारे यहां 60 प्रतिशत भूमि पर खेती होती, जिसे आसानी से 78 प्रतिशत तक किया जा सकता है। दुनिया का वार्षिक वर्षा आंकड़ा 63 से. मी. है। चीन में 61 से. मी. और अमेरिका में 48 से. मी. वर्षा होती है। भारत में वर्षभर में 104 से. मी.

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