Aksh's blog

आपके अनाज में क्यों डाला जा रहा है ज़हर?

आपके अनाज में क्यों डाला जा रहा है ज़हर?

इस्तेमाल का सिलसिला बदस्तूर जारी है. जानकारों का कहना है कि इन कीटनाशकों में से कुछ तो बहुत ही ख़तरनाक हैं और कई देशों में इनके चंगुल से बाहर निकलने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद दी जा रही है. लेकिन उनका कहना है कि कुछ देशों में कीटनाशकों के इस्तेमाल के रोकथाम में मुश्किल हो रही है और भारत में यह एक बड़ी चुनौती है. भारत दुनिया के बड़े कृषि उत्पादकों में से एक है और कृषि रसायनों का एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी है. भारत सरकार का कहना है कि उसने नुक़सानदेह रसायनों की रोकथाम के लिए सख्त इंतजाम किए हैं, लेकिन ये जरूरी नहीं कि वह पश्चिमी मानदंडों के अनुरूप हों.

हक के इंतजार में किसान

हक के इंतजार में किसान

साल 2016-17 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रति क्विंटल 5100 रुपये होना चाहिए था। इस पर चौंकने की जरूरत नहीं है। वैधानिक रूप से किसानों को इतनी ही राशि मिलनी चाहिए।

जल संरक्षण एवं प्रबंधन की जरूरत

जल संरक्षण एवं प्रबंधन

20 साल पहले तक बगीचों में अनगिनत पेड़ हुआ करते थे तो आज उनकी संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। पेड़ सूख गए तो नए पौधे लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। इन्हीं सब का नतीजा है कि जल संकट की समस्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में पीने के पानी से लेकर सिंचाई तक के लिए पानी की सारी जरूरतें धरती से पूरी की जा रही हैं। इसका परिणाम है कि जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। निश्चित ही यह चिंता का विषय है।

केवल अच्छा मानसून ही कृषि और विकास दर का सूचक नही

केवल अच्छा मानसून ही कृषि और विकास दर का सूचक नही

भारत के मौसम विभाग ने जबसे इस साल सामान्य से ज्यादा मानसून की भविष्यवाणी की तब सेलोगों में मानसून चर्चा का विषय बन गया है। अधिकतर लोग यही बात कर रहे हैं कि अच्छी बारिश से न सिर्फ कृषि को बहुत ज्यादा फायदा होगा लेकिन पूरी इकोनॉमी और शेयर बाजार को भी फायदा होगा। जिसके लिए मानसून जरूरी है। अगर आप गहराई में जाएंगे तो पाएंगे कि ये तर्क गलत साबित होते हैं।

 

मौसम विभाग पर भरोसा नहीं

 

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