Aksh's blog

जल संरक्षण एवं प्रबंधन की जरूरत

जल संरक्षण एवं प्रबंधन

20 साल पहले तक बगीचों में अनगिनत पेड़ हुआ करते थे तो आज उनकी संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। पेड़ सूख गए तो नए पौधे लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। इन्हीं सब का नतीजा है कि जल संकट की समस्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में पीने के पानी से लेकर सिंचाई तक के लिए पानी की सारी जरूरतें धरती से पूरी की जा रही हैं। इसका परिणाम है कि जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। निश्चित ही यह चिंता का विषय है।

केवल अच्छा मानसून ही कृषि और विकास दर का सूचक नही

केवल अच्छा मानसून ही कृषि और विकास दर का सूचक नही

भारत के मौसम विभाग ने जबसे इस साल सामान्य से ज्यादा मानसून की भविष्यवाणी की तब सेलोगों में मानसून चर्चा का विषय बन गया है। अधिकतर लोग यही बात कर रहे हैं कि अच्छी बारिश से न सिर्फ कृषि को बहुत ज्यादा फायदा होगा लेकिन पूरी इकोनॉमी और शेयर बाजार को भी फायदा होगा। जिसके लिए मानसून जरूरी है। अगर आप गहराई में जाएंगे तो पाएंगे कि ये तर्क गलत साबित होते हैं।

 

मौसम विभाग पर भरोसा नहीं

 

गरीबी, भुखमरी, कुपोषण की जड़

गरीबी, भुखमरी, कुपोषण की जड़

गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, असमान विकास की उपर्युक्त स्थितियां एक दिन में पैदा नहीं हुई हैं। इसकी जड़ स्वायत्तशासी आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थतंत्र के क्रमिक पतन में निहित हैं। आजादी के बाद पूंजी प्रधान विकास रणनीति अपनाने से विकास क्रम में मानव शक्ति का महत्व गौण हो गया। इसके परिणामस्वरूप भारत के अपने शिल्प, लघु व कुटीर उद्योग, कला और पारंपरिक रूप से चलते आ रहे अन्य धंधे धीरे-धीरे खत्म होने लगे। इन धंधों से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अधिकांश जनता को आय होती थी, लोगों की जरूरतें स्थानीय स्तर पर पूरी होती थी और गरीबों का पेट पलता था। इन धंधों के उजड़ने से गरीबों का सहारा छिनता रहा। इससे धीरे-धीर

हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

क्या आपको पता है कि हमारे देश में एक ट्रेन ऐसी भी चलती है, जिसका नाम ‘कैंसर एक्सप्रेस’ है? सुनने में यह बात हतप्रभ करने वाली है, पर यह सच है, भले ही इस ट्रेन का नाम कुछ और हो, पर लोग उसे इसी नाम से जानते हैं। यह ट्रेन कैंसर बेल्ट से होकर गुजरती है। यह ट्रेन भटिंडा से बीकानेर तक चलती है। इसमें हर रोज कैंसर के करीब 70 यात्री सफर करते हैं। जानते हैं यह यात्री कहाँ के होते हैं? पंजाब का नाम तो सुना ही होगा आपने?

Pages