Aksh's blog

सूखा राहत में स्वराज की मांग

सूखा राहत में स्वराज की मांग

यह बात कई बार दोहराई जा चुकी है कि बाढ़ और सुखाङ अब असामान्य नहीं, सामान्य क्रम है. बादल, कभी भी-कहीं भी बरसने से इंकार कर सकते हैं. बादल, कम समय में ढे़र सारा बरसकर कभी किसी इलाके को डुबो भी सकते हैं. वे चाहें, तो रिमझिम फुवारों से आपको बाहर-भीतर सब तरफ तर भी कर सकते हैं; उनकी मर्जी. जब इंसान अपनी मर्जी का मािलक हो चला है, तो बादल तो हमेशा से ही आजाद और आवारा कहे जाते हैं. वे तो इसके लिए स्वतंत्र हैं हीं. भारत सरकार के वर्तमान केन्द्रीय कृषि मंत्री ने जलवायु परिवर्तन के कारण भारतीय खेती पर आसन्न, इस नई तरह के खतरे को लेकर हाल ही में चिंता व्यक्त की है.

बाजार पर निर्भरता ख़त्म होने पर ही किसानों विकास

बाजार पर निर्भरता ख़त्म होने पर ही किसानों विकास

विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र देश के सबसे मजबूत स्तम्भ किसानों के लिए यह बजट लाभकारी हो सकता है देश में किसानो का विकास अगर हो पाया तभी देश का समुचित विकास हो पायेगा इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारी वर्तमान सरकार नें जो भी बजट बनाया है वह स्वागत के योग्य है माननीय प्रधानमंत्री जी नें देश में किसानों के लिए कुछ किया है परंतु वह अधूरा है

किसानों को आज तक क्या मिला ?

kisanhelp.in

किसानों की बात... ये मेरी लिए कोई नई बात नहीं है। हम किसानों के दर्द और तकलीफ को बहुत सालों से उठा रहे हैं और साथ में ये भी सच्चाई है कि उनके लिए घोषणाएं और स्कीमों की कोई कमी नहीं होती है। बजट में भी बड़े प्रस्ताव रखे गए किसानों के लिए, सरकार ने अपनी तरफ से ये लक्ष्य तय किया कि किसानों की आमदनी अगले पांच सालों में दोगुनी हो जाएगी। मेरे सवाल बेहद सीधे और बुनियादी हैं।

उर्वरता की हिंसक भूमि

उर्वरता की हिंसक भूमि

खेतों में उर्वरता बढ़ाने के लिए, नाइट्रोजन के उर्वरक पाने के लिए यूरोप दुनिया के कोने-कोने खंगाल रहा था। ऐसा एक स्रोत था ‘गुआनो’। यह आता था दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी छोर से दूर, प्रशांत महासागर के द्वीपों से। गुआनो असल में चिड़िया की बीट है। इन निर्जन द्वीपों पर न जाने कब से समुद्री चिड़ियाओं का वास था, जो समुद्र से मछली और दूसरे प्राणियों का शिकार करती हैं। अनगिनत इन चिड़ियों की बीट इन द्वीपों पर जम जाती थी और वहां इनके पहाड़ खड़े हो गए थे। बारिश कम होने के कारण ये पहाड़ जैसे के तैसे बने रहे और इनके उर्वरक गुण धुले नहीं थे। कुछ जगह तो बीट के ये पहाड़ 150 फुट से भी ऊंचे थे।

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