Aksh's blog

हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

क्या आपको पता है कि हमारे देश में एक ट्रेन ऐसी भी चलती है, जिसका नाम ‘कैंसर एक्सप्रेस’ है? सुनने में यह बात हतप्रभ करने वाली है, पर यह सच है, भले ही इस ट्रेन का नाम कुछ और हो, पर लोग उसे इसी नाम से जानते हैं। यह ट्रेन कैंसर बेल्ट से होकर गुजरती है। यह ट्रेन भटिंडा से बीकानेर तक चलती है। इसमें हर रोज कैंसर के करीब 70 यात्री सफर करते हैं। जानते हैं यह यात्री कहाँ के होते हैं? पंजाब का नाम तो सुना ही होगा आपने?

भारतीय देसी गौ वंश देश की अर्थव्यवस्था का मूल आधार

भारतीय देसी गौ वंश

गिरती अर्थव्यवस्था. (आयात बिल पेट्रोल डीजल रसोई गैस दवाई उर्वरक सब विदेशो से आता है, घर की जगह विदेशी उत्पादों से मोह किसी भी वजह से) किसानों की आत्महत्या. (कारण हर चीज बाहर से खरीदना रासायनिक खेती में, जैसे बीज, खाद, कीट नाशक, ट्रैक्टर, डीजल और उपज के समय मंडी में भाव न मिलना.)

बढ़ती महंगाई और बढती गरीबी (मूल कारण अत्यधिक टैक्स, पेट्रोल, डीज़ल की बढ़ती कीमत, रुपये की गिरावट, भ्रस्टाचार और अंग्रेजी व्यवस्था)

बिजली की कमी (प्राकृतिक संसाधन की कमी और उसपर होने वाला खर्च)

पानी की कमी. (ग्लोबल वार्मिंग)

शुद्ध भोजन की कमी (केमिकल FARMING)

खेती से मोहभंग खतरे की घंटी

खेती से मोहभंग खतरे की घंटी

खेती से मोहभंग खतरे की घंटीकिसी कृषि प्रधान देश के लिए इससे बुरी खबर नहीं हो सकती कि उस देश के किसान अपने पेशे से पलायन करने लगें। जी हां, किसानों के खेती से मुंह मोड़ने की बात अब तक मीडिया में ही पढ़ने को मिलती थी। अब केन्‍द्रीय कृषि मंत्रालय की स्‍थाई समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में यह बात मान ली है। इसे सरकार की उदासीनता कहें या फिर बदलती परिस्थितियां कि किसान अपनी उपज से लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं। खेती से किसानों का मोहभंग का हाल क्‍या है इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि वर्ष 2001 में देश में 12 करोड़ 73 लाख किसान थे जो 2011 में घट कर 11 करोड़ 87 लाख रह गए। किसानों का खेती छोड़ने

आमदनी बढ़े तो फांसी क्यों चढ़ें किसान

आमदनी बढ़े तो फांसी क्यों चढ़ें किसान

मुझे चार दशक हो गए हैं अर्थशास्त्रियों की एक-सी बातें सुनते कि किसान उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीक का प्रयोग करें, लागत घटाएं, फसलों में विविधता अपनाएं, सिंचाई क्षमता बढ़ाएं व बिचौलियों के चंगुल से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के प्लेटफॉर्म पर जाएं। उनकी मूलत: यही धारणा है कि कृषि संकट मुख्य रूप से किसानों की देन है, क्योंकि उन्होंने आधुनिक तकनीक व नई किस्मों का उपयोग नहीं किया। या वे बैंक कर्ज का उपयोग करना नहीं जानते। वे उत्पादन लागत को कम नहीं कर पा रहे हैं। वे कृषि आय में बढ़ोतरी के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि के पक्ष में रहे हैं। यह भी कहा जाता है कि आज के दौर में किसान तभी बचे रह सकत

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