गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की नई योजना पर काम कर रही सरकार

अक्टूबर से शुरू पेराई सीजन 2019-20 में शकर का उत्पादन 51 लाख टन घटकर 280 लाख टन रह जाने का अनुमान है। पिछले सीजन में शकर का घरेलू उत्पादन 331 लाख टन रहा था। इस बीच सरकार गन्ना किसानों का बकाया भुगतान के लिए एक नई योजना पर तेजी से काम कर रही है।

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरुआती बारिश कम होने और फिर बढ़ जैसी स्थिति के कारण गन्ने की फसल को नुकसान हुआ। यही वजह है कि शकर का उत्पादन 12-13 फीसदी घटने की आशंका जताई गई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा शकर उत्पादन घटने की आशंका है। पिछले साल वहां 107 लाख टन शकर का उत्पादन हुआ था, जबकि चालू पेराई सीजन में राज्य में शकर उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब 40 लाख टन घटने की आशंका जताई जा रही है। कर्नाटक में भी चालू पेराई सीजन में शकर का उत्पादन अनुमान से कम रहने की आशंका है।
केंद्र ने नहीं बढ़ाया एफआरपी

शकर मिलों ने आंशिक रुप से गन्ने की पेराई शुरू कर दी है, लेकिन 15 नवंबर से ही इस काम में तेजी आने की संभावना है। देशभर में कुल 534 शकर मिलें हैं। फिलहाल इसमें से करीब 300 मिलों में उत्पादन शुरू हो गया है। पेराई सीजन 2019-20 के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में बढ़ोतरी नहीं की है। पिछले पेराई सीजन में 275 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर रखा है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में किसानों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एफआरपी के आधार पर गन्ने का भुगतान किया जाता है, जबकि अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु आदि में राज्य सरकारें गन्ने का राज्य परामार्श मूल्य (एसएपी) तय करती हैं।
उत्तर प्रदेश की मिलों पर बकाया अधिक

पहली अक्टूबर, 2019 से गन्ने का नया पेराई सीजन शुरू हो गया है, लेकिन अब भी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की शकर मिलों पर किसानों का बकाया है। सबसे ज्यादा करीब 4,000 करोड़ रुपए बकाया उत्तर प्रदेश की शकर मिलों पर है।
भुगतान को लेकर मिलों पर सख्ती

केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का रास्ता तलाश रही है। इसके तहत नए सीजन में गन्ने की खरीदी के साथ पुराना बकाया भुगतान को भी करने की बाध्यता लागू करने की योजना है। इसके तहत कई मिलों को बैंकों में अग्रिम रकम रखने के साथ ही पुराना भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बैंक लिमिट अलग से बनाने की योजना बनाई जा रही है। इस मद से केवल पुराने भुगतान करने की पात्रता रहेगी।