गन्ना के साथ करें सहफसली खेती

गन्ना के साथ करें सहफसली खेती

 धामपुर शुगर मिल की ओर से निकाली जा रही मानसून गन्ना बुवाई जागरूकता रैली के माध्यम से किसानों को सहफसली गन्ना खेती के लाभों से अवगत कराया गया। 

सियासत की फसल, चुनौतियों की खेती

सियासत की फसल, चुनौतियों की खेती

खेती-किसानी को लेकर भले ही सियासत की फसल खूब लहलहा रही हो, लेकिन उत्तराखंड में खेती की हालत बेहद नाजुक हो चली है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। 12 साल पहले राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का योगदान 16.04 फीसद था, जो घटकर अब 8.94 फीसद पर आ गया है। यही नहीं, राज्य गठन से अब तक के वक्फे में 72 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि बंजर में तब्दील हो गई। हालांकि, गैर सरकारी आंकड़ों में यह संख्या एक लाख हेक्टेयर पार कर गई है। सूबे के पहाड़ी क्षेत्र में खेती आज भी सिंचाई की राह ताक रही है। ऐसे तमाम मामलों के बीच खेती की दशा को सुधारना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

खरीफ फसलों का 38 लाख टन कम हो सकता है उत्‍पादन

खरीफ फसलों का 38 लाख टन कम हो सकता है उत्‍पादन

चालू खरीफ सीजन में कुल खाद्यान्न उत्पादन 13.46 करोड़ टन रहने का अनुमान है. इस तरह पिछले साल के मुकाबले उत्पादन में 2.77 फीसदी यानी करीब 38 लाख टन की गिरावट रहेगी. कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 के लिए प्रमुख खाद्यान्न उत्पादों का अग्रिम अनुमान जारी किया. इसके तहत खरीफ चावल का कुल उत्पादन 9.44 करोड़ टन तक अनुमानित है. खरीफ दलहनों का कुल उत्पादन 87.1 लाख टन और गन्ने का उत्पादन 33.76 करोड़ टन तक अनुमानित है. औसत से 5 फीसदी कम हुई वर्षा मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2017-18 के लिए खरीफ एवं रबी फसलों को मिलाकर कुल उत्पादन 27.56 करोड़ टन रहने का अनुमान है.

देश के विकास के लिए कृषि और किसानों के विकास की जरूरत : राधामोहन

देश के विकास के लिए कृषि और किसानों के विकास की जरूरत : राधामोहन

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने आज कहा कि किसानों की आय में इजाफा करने के लिए सीमित संसाधनों और जमीन के निश्चित क्षेत्र की उपलब्धता सुनिश्चित करने, उचित प्रौद्योगिकी अपनाने तथा कम लागत घटाने की जरूरत है। श्री सिंह ने यहां स्टार्ट अप कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के एक बैठक में कहा कि देश में कृषि लोगों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधी से अधिक आबादी लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। देश को विकसित करने के लिए कृषि और किसान को विकसित करने की जरूरत है। उन्होेंने इस संबंध में एक और समूह गठन करने के लिए कहा जिससे इन सभी

पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किसान मेला 6 से 9 अक्टूबर2017तक

पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा  किसान मेला 6 से 9 अक्टूबर2017तक

उतराखंड स्थित पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में 6 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक प्रसिद्द किसान मेले का आयोजित होने जा रहा है। इस चार-दिवसीय मेले का आयोजन इस बार पुराने स्थल, गांधी पार्क में ही होगा।

विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक, डा.वाई.पी.एस. डबास के अनुसार इस मेले में उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के साथ ही नेपाल से भारी संख्या में किसान भाग लेंगे।

डॉ डबास ने बताया कि मेले में 6-7 अक्टूबर को फल-फूल, शाक-भाजी एवं परिरक्षित पदार्थों की प्रदर्शनी व प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।