अब गेहूं की पैदावार होगी 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

अब गेहूं की पैदावार होगी 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने देश के अलग-अलग भूभागों के लिये गेहूं की दो नयी प्रजातियां विकसित की हैं.

आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इस केंद्र की विकसित नयी गेहूं प्रजाति ‘पूसा उजाला’ की पहचान ऐसे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिये की गयी है जहां सिंचाई की सीमित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. इस प्रजाति से एक-दो सिंचाई में 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ली जा सकती है.

फसलों को बीमारियों से बचायें

फसलों को बीमारियों से बचायें

वर्तमान समय में खेत की सतत निगरानी करते हुये फसल में रोगों से बचाव हेतु उपाय कर लें। बताया कि अरहर व धान का पत्ती लपेटक रोग से पीले रंग की सूड़ियाॅ पौधे की चोटी की पत्तियों को लपेटकर सफेद जाला बना लेती हैं और उसी में छिपी पत्तियों को खाती हैं और बाद में फूलों,फलों को नुकसान पहुॅचाती हैं। बचाव हेतु मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिषत 1 लीटर या क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी 1.250 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें या नीम का तेल गौमूत्र के साथ स्प्रे करें ।
धान का गन्धी बग- 

छत्तीसगढ़ धनिया में स्वाद के साथ खुशबू भी

छत्तीसगढ़ धनिया में स्वाद के साथ खुशबू भी

हरा धनिया की दो पत्ती सब्जी या सलाद के स्वाद को बढ़ा देती है। अब इसी स्वाद को दोगुना करने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विवि (इंगांकृविवि) के वैज्ञानिकों ने 'छत्तीसगढ़ धनिया" विकसित किया है, जिसमें सामान्य धनिया के अपेक्षाकृत पैदावार और खुशबू कहीं ज्यादा है। गौरतलब है कि राज्य के किसान धनिया की खेती करते हैं, लेकिन बीज लगने से पहले पत्तियों को तोड़कर उपयोग कर लेते हैं या बाजार में बंडल बनाकर बेच देते हैं। ऐसे में अब 'छत्तीसगढ़ धनिया" की बोनी कर उपयोगिता के साथ-साथ बीज का संरक्षण भी कर सकेंगे।

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