गेहूं में खरपतवार प्रंबधन की आधुनिक विधियां

गेहूं में खरपतवारों की रोकथाम को आधुनिक युग में खरपतवार निंयत्रण के बजाय खरपतवार प्रंबधन के नाम से ज्यादा जाना जाता है विधियां वही है केवल धारणा बदली है। गेहूं में खरपतवार प्रंबधन की आधुनिक विधियां खरपतवार प्रबंधन के निरोधी उपाय शस्य विधियों द्वारा खरतवार प्रंबधन रासायनिक खरपतवार निंयत्रण निरोधी उपायः उत्तम क्वालिटी के खरपतवार मुक्त बीजो का प्रयोग करें ताकि गेहूं की बुआई के साथ खरपतवारों की बुआई न हों। अच्छी तरह गली सड़ी गोबर की खाद का ही प्रयोग करें कच्ची गोबर की खाद में खरपतवार के बीज जीवित रहते है। क्योंकि पशु चारे के साथ जो खरतवारों के बीज होते है वह बिना गले बाहर आ जाते है। यह बीज कच्च

फसलों को पाले से बचाने के लिए करें लगातार करें सिंचाई

फसलों को पाले से बचाने के लिए करें लगातार करें सिंचाई

गत दिनों से मौसम में अचानक परिवर्तन होने की स्थिति को देखते हुए किसान ऐसी स्थिति में लगातार सिंचाई करें। अभी कुछ दिनों से मौसम में अचानक कभी उतार तो कभी चढ़ाव महसूस हो रहा है। इसका फसलों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इसको पाला कह सकतें है।

केंद्र सरकार ने हटाया आयात शुल्क, किसानों में रोष

 केंद्र सरकार ने हटाया आयात शुल्क, किसानों में रोष

कृषि मंत्रालय लगातार कहता आ रहा है कि 2015-16 में भारत में बड़े स्तर पर गेहूं की पैदावार हुई थी। इसके अलावा मंत्रालय ने अगले साल की पैदावार का अनुमान भी काफी ज्यादा बताया था। यानी किसानों को अच्छी कमाई होने के बात कही जा रही थी।

मगर, गेहूं की बुवाई के समय केंद्र सरकार ने गेहूं से आयात शुल्क हटा दिया है, जिससे केंद्रीय कृषि मंत्रालय के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब तक भारतीय व्यापारी करीब 35 लाख टन गेहूं के आयात के लिए अनुबंध कर चुके हैं।

जब खेत नहीं रहेंगे

जब खेत नहीं रहेंगे

कृषि योग्य ज़मीन को लेकर जो आंकड़े दे रहे हैं वे भविष्य की बहुत ही भयानक तस्वीर दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर विगत 10 वर्षों में 21 लाख हेक्टेयर खेती लायक ज़मीन दूसरे कामों के लिए अधिग्रहीत कर चुकी है। जमीन अधिग्रहण पर सरकार की नीति वास्तव में ऐसी है कि अगले 10 वर्षों में लोगों के सामने भूखों मरने की नौबत आ सकती है। हमारे देश की लगभग 70 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। पालेकर मानते हैं कि बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के चलते गैर कृषि कार्यों के लिए जमीन की जरूरत बढ़ी है,और सरकार इस जरूरत को पूरी करने के लिए खेती लायक ज़मीनों का अधिग्रहण कर रही है। वास्तव में आबादी उतना

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