बारिश से तबाह किसानों को मोदी ने दी बड़ी सौगात

बिन मौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाह हुए लाखों किसानों को राहत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बड़े ऐलान किए। नई व्यवस्था के तहत अब 50 फीसदी की जगह 33 फीसदी फसल खराब होने पर भी किसान मुआवजे के हकदार होंगे।

प्रधानमंत्री ने मुआवजे की राशि में भी 50 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया। उन्होंने बैंकों से कहा कि वे बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के ऋण का पुनर्गठन करें।

साथ ही बीमा कंपनियों से भी किसानों के दावों का निपटान सक्रियता से करने को कहा। किसानों को मुआवजा देने संबंधी प्रावधान में आजादी के बाद पहली बार बदलाव हुआ है।

पानी के प्रबंधन व जैविक खाद के उपयोग से सस्ती होगी खेती

ची से सटे ओरमांझी के दूबराज महतो ऐसे किसान हैं, जिनके पास न खेती के लायक पर्याप्त जमीन है और न ही खेती से जुड़ी अत्याधुनिक जानकारी। दूबराज नेशनल हाइवे 33 के किनारे स्थित किराये की छह एकड़ जमीन पर सब्जियों की खेती करते हैं। इनमें से दो-ढाई एकड़ भूमि ऐसी है, जो तीन-चार साल पहले तक टांड़ हुआ करती थी। दूबराज ने उसे अपनी लगन-मेहनत से समतल व उर्वर बनाया। भू-स्वामी को वे प्रति एकड़ की दर से तीन से चार हजार रुपये सालाना किराया देते हैं। डेढ़ से दो लाख रुपये सालाना वे खेती में खर्च करते हैं। खेत के बगल में ही वे परिवार वालों की मदद से किराना की दुकान चलाते हैं और खेती को भी समय देते हैं। दूबराज साला

अब कचरे से तैयार होगी जैविक खाद

रासायनिक खाद न मिलने से किसान परेशान रहते हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि ने इस समस्या का समाधान जैविक खाद के तौर पर निकाला है। आसपास के क्षेत्र को साथ-सुथरा रखने और कचरे को फेंकने की बजाए उससे जैविक खाद बनाई है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह खाद फसल की पैदावार बढ़ाने के साथ इसमें लगने वाली बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम है। कृषि विवि का कृषि विज्ञान केन्द्र जबलपुर इन दिनों विवि के कचरे से खाद तैयार कर बाजार में 4 सौ रुपए क्विंटल बेच भी रहा है।

रासायनिक खाद से सस्ती और बेहतर

रासायनिक खाद और कीटनाशक से मुक्त हो कृषि

हम किसी फल को हाथ में लेकर, सूंघकर, हल्के से दबाकर अथवा दाग-धब्बे जांचकर उसकी ताजगी का अंदाजा लगा सकते हैं, लेकिन हम कैसे जान पाएंगे कि उसके अंदर कितनी कीटनाशक दवाएं भरी हैं? हम खाना क्यों खाते हैं? स्वाभाविक है, इसलिए कि हमारे शरीर को जिंदा रहने के लिए पोषण की जरूरत होती है। पोषक खाना हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है। बीमारियों से हम तभी लड़ सकते हैं जब हम अच्छा-पोषक खाना खा रहे हों। लेकिन यदि हम अपने खाने के साथ बड़ी मात्रा में कीटनाशक भी खा रहे हों तो इसका स्पष्ट मतलब है कि पोषण के साथ-साथ हम जहर भी खा रहे हैं और इससे खाना खाने का बुनियादी मकसद ही ध्वस्त हो जाता है।

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