किसान खेती को जहरीला नहीं बनाएं

किसान खेती को जहरीला नहीं बनाएं

भूमि' कृषि प्रधान भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है। देश की दो तिहाई से अधिक आबादी आज भी  कृषि, पशुपालन और इससे सम्बंधित व्यवसायों पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पूरी तरह भूमि पर निर्भर है, लेकिन हाल के वर्षों में सरकार भूमि अधिग्रहण से ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि योग्य निजी और सार्वजनिक जमीन निरन्तर सिकुड़ती जा रही है।

किसान खेती को फायदे का धंधा बनाएं जरूर, लेकिन लोगों की जान की कीमत पर नहीं। किसानों को जैविक और परंपरागत खेती करने की सलाह भी दी। किसान खेती को जहरीला नहीं बनाएं। रसायनों का कम उपयोग करें।

गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार

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 गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार

अब गाय के पेट में से प्लास्टिक पौलिथिन निकलने के लिए पेट फाड़ने की जरूरत नहीं.. गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार किया जा सकता है पौलिथिन खाई गाय के जुगाली करते समय उसके दांतों से आवाज आती है !

उपचार इस प्रकार है सामग्रीः

100 ग्राम सरसों का तेल,

100 ग्राम तिल का तेल,

100 ग्राम नीम का तेल और

100 ग्राम अरण्डी का तेल 

खाद्य सुरक्षा अधिनियम सभी राज्यों में अप्रैल 2016 तक लागू करने की घोषणा

खाद्य सुरक्षा खाद्य सुरक्षा अधिनियम

केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम देश के सभी राज्यों में अप्रैल 2016 तक लागू करने की 21 जनवरी 2016 को घोषणा की. केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने नई दिल्ली में इसकी घोषणा की.

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने वाले राज्यों की संख्या पिछले वर्ष 11 से बढ़कर 25 हो गई थी. अभी तक देश भर में 97 प्रतिशत राशन कार्डों का डिजिटीकरण किया जा चुका है. 

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन से संबंधित मुख्य तथ्य:

दूर होगी दाल की किल्लत आईएआरआई के वैज्ञानिकों ने अरहर की तैयार की एक नई किस्म

दूर होगी दाल की किल्लत आईएआरआई के वैज्ञानिकों ने अरहर की  तैयार की एक नई किस्म

दाल कभी गरीबों का भोजन माना जाता था लेकिन अब दाल गरीबों के लिए एक दिवा स्वप्न से अधिक नही है दाल की किल्लत को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के वैज्ञानिकों ने अरहर की एक नई किस्म तैयार की है जिसकी फसल न सिर्फ कम समय में पककर तैयार हो जाएगी बल्कि उससे उत्पादन भी अधिक होगा। इस किस्म के आने से जहां देश में दलहन का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, वहीं यह किसानों के लिए विशेष फायदेमंद होगी।  दालों की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर एक राहत की खबर है।

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