फव्वारा सिंचाई से पानी की बर्बादी कम

देश भर पारंपरिक तौर पर होने वाले कृषि कार्यों में बहुत अधिक जल बर्बात होता है जिसे उन्नत सिंचाई प्रणालियों के प्रयोग से कम किया जा सकता है। ऐसी ही एक प्रणाली है फव्वारा सिंचाई या बौछारी सिंचाई प्रणाली इसके प्रयोग से किसान 30 से 50 प्रतिशत तक पानी का अपव्यय बचाया जा सकता है।
बौछारी सिंचाई का तरीका

धान की फसल को बरबाद कर सकता है खैरा

खरीफ फसलों में धान की फसल मुख्य है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है। इस फसल में खैरा रोग की संभावना ज्यादा होती और अगर समय से उपचार नहीं हुआ तो फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। समय रहते इसकी पहचान और रोग से बचाव का उपाय कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस रोग का प्रमुख कारण मिट्टी में जिंक की कमी होती है, जिसके बारे में मृदा परीक्षण कर जाना जा सकता है।

बारिश के बाद गेहूं पर अब फफूंदी की मार

वीट आफ्टर rain

बारिश ने गेहूं को खेतों में बिछा दिया। अब पर्याप्त हवा, धूप नहीं मिलने से गिरी फसल भी गलने लगी है। वह फफूंदी की चपेट में आ गई है। इससे उसमें निकलने वाला दाना कमजोर तो होगा ही संक्रमण से उसमें बदबू भी आने लगेगी। सिर्फ दाना ही नहीं, गेहूं का पौधा भी गलने लगा है, जिससे भूसा भी नहीं हो सकेगा। यह किसानों के लिए कुदरत की दोहरी चोट होगी।

फूलों की खेती से हों मालामाल

हम ग्लैडोलस, गुलाब, गेंदा जैसे कई फूलों की खेती करते हैं। सबसे बढिय़ा कमाई ग्लैडोलस से होती है। यह पांच माह में तैयार हो जाता है और एक बार की फसल में दो से तीन लाख तक की कमाई हो जाती है।” वो आगे बताते हैं,”ग्लैडोलस फूल की खेती उन किसानों के एक लिए अच्छा अवसर है जो कम समय में बढिय़ा कमाई करना चाहते हों।”

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