किचन गार्डन (सब्जी बगीचा)- आज की आवश्यकता

सब्जी बगीचा मे सब्जी उत्पादन का प्रचलन प्रचीन काल से चला आ रहा है। अच्छे स्वास्थ्य के लिये दैनिक आहार मे संतुलित पोषण का होना बहुत जरूरी है। फल एवं सब्जियां इसी संतुलन को बनाये मे अपना महत्वपूर्ण योगदान देते है, क्योकि ये विटामिन, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत होते है। फिर भी यह जरूरी है कि इन फल एवं सब्जियो की नियमित उपलब्धता बनी रहे इसके लिये घर के

बेंवर खेती: रसायानिक खेती का बेहतर विकल्प

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमलोग प्रतिदिन 0.5 मिली ग्राम जहर खाते हैं. लेकिन यह सच है. इंटरनेश्नल फाउंडेशन आफ आर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने आलू के 100 नमूनों में से 12 और टमाटर के 100 नमूनों में से 48 में जहर पाया था. इसी तरह उत्तरप्रदेश के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि हमारे शरीर में साल भर में करीब 174 मिली ग्राम जहर पहुंचता है और यह जहर अगर शरीर में एक साथ पहुंच जाए तो व्यक्ति की मृत्यु सुनिश्चित है.

खेती की लागत कम करने के उपाय

खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं- उत्पादन को बढ़ाएँ व लागत खर्च को कम करें। कृषि में लगने वाले मुख्य आदान हैं बीज, पौध पोषण के लिए उर्वरक व पौध संरक्षण, रसायन और सिंचाई। खेत की तैयारी, फसल काल में निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई व फसल की कटाई-गहाई-उड़ावनी आदि कृषि कार्यों में लगने वाली ऊर्जा की इकाइयों का भी कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है। 

इनका उपयोग किया जाना आवश्यक है, परंतु सही समय पर सही तरीके से किए जाने पर इन पर लगने वाली प्रति इकाई ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इनका अपव्यय रोककर व पूर्ण या आंशिक रूप से इनके विकल्प ढूँढकर भी लागत को कम करना संभव है। 

जैविक खेती के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता

सरकार ने केन्‍द्रीय क्षेत्र की विभिन्‍न योजनाओं जैसे राष्‍ट्रीय सतत कृषि मिशन के तहत देश में जैविक खेती को अपनाने के लिए राज्‍य सरकारों के जरिए किसानों को वित्‍तीय सहायता देने का प्रावधान बनाया है। बागवानी के एकीकृत विकास का मिशन (एमआईडीएच), राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) और राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) भी इन योजनाओं में शामिल हैं। 

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