पत्तियों पर बोरॉन के प्रयोग से कद्दू वर्गीय फसलों के उत्पादन में वृद्धि

देश की विभिन्न मृदाओं और फसलों में बोरॉन की कमी देखी जा रही है जिससे फसलोत्पादन सीमित हो रहा है। पत्तियों पर बोरॉन के प्रयोग से कद्दू वर्गीय फसलों में बेल के विकास, फलों के आकार, संख्या और फसल में वृद्धि होती है। इससे पहले, झारखण्ड के रांची में खीरे (कुकुमिस सैटिवस एल.) की पत्तियों पर बोरिक अम्ल 25 पीपीएम के तीन छिड़काव के प्रभाव का अवलोकन किया गया। ऐसा पाया गया कि जिन बेलों पर बोरिक अम्ल का छिड़काव किया गया था उनमें फलों की वृद्धि 10.5 प्रति बेल से 12.2 हो गई साथ ही, फलों का औसत भार भी 368 ग्राम से बढ़कर 412 ग्राम हो गया। जिस क्षेत्र में बोरिक अम्ल का छिड़काव नहीं किया गया था उसकी उपज 48.6

वर्मी कम्पोस्ट खेती के लिए वरदान

वर्मी कम्पोस्ट खेत की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता है। यह एक प्राकृतिक खाद है। जिसके इस्तमाल से किसी भी तरह की हानि फसल और मनुष्य को नहीं होती। जब किसान अपनी फसल काट लेता है तो उस खेत की उपजाऊ शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे समय पर किसानों को वर्मी कम्पोस्ट यानी प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। पूर्व जिला कृषि अधिकारी साम्बा अशोक गुप्ता ने इस बारे में किसानों को जानकारी दी।

 

फायदेमंद है गर्मी में लौकी की खेती

लौकी अत्यंत स्वास्थ्यप्रद सब्जी है जिसकी खेती इस क्षेत्र में परवल की ही तरह प्रमुखता से की जा रही है। गर्मी में तो इसकी खेती विशेष रूप से फायदेमंद है। यही वजह है कि क्षेत्रीय किसान ग्रीष्मकालीन लौकी की खेती बड़े पैमाने पर किए हैं। बैरिया निवासी अवकाश प्राप्त कैप्टन व खेती के जानकार प्रभुनाथ सिंह ने लौकी की ग्रीष्मकालीन खेती से जुड़ी तमाम जानकारियां दीं।

उन्नतशील किस्में

पूसा समर प्रोलिफिक राउंड : इसके फल गोलाकार हरे रंग के होते हैं। इसकी पैदावार 200 से 250 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है।

बेमौसम बरसात व चौपट फसल की मार झेलने वाले किसानों का मुआवजा बढ़ाएगी सरकार: जेटली

देश भर में बेमौसम बरसात और फसल चौपट होने के दोहरे मार को झेल रहे किसानों को राहत देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा की केंद्र सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रभावित किसानों को न्यायसंगत व अधिक मुआवजा दिलवाने का प्रयास कर रही है.

राजस्थान के तिमेली में किसानों से बातचीत करते हुए अरुण जेटली ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को हुए भारी नुकसान से काफी चिंतित हैं और इसीलिए सरकार पूरी कोशिश करेगी की बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि तथा चौपट हुए खड़ी फसलों की मार झेलने वाले किसान भाई बहनों को उचित मुआवजा मिले.

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