रासायनिक खाद के दुष्परिणाम, जैविक खेती से संवरेगा भविष्य

किसान अब रासायनिक खेती की बजाय जैविक खेती अपनाने लगे हैं। पश्चिमी राजस्थान की चार उच्च मूल्य की फसलों तिल, ग्वार, ईसबगोल जीरे का प्रतिवर्ष करीबन 2 हजार करोड़ का निर्यात होता है। इसमें जैविक खेती भी शामिल है। काजरी ने निरंतर शोध के बाद किसानों को समूह रूप में इसकी जानकारी दी। अब किसान जैविक खाद तैयार कर फसल लेने लगे हैं। 

मारवाड़ में 80 प्रतिशत भू-भाग पर वर्षा आधारित खेती होती है। यहां रासायनिक खाद का उपयोग बहुत कम किया जा रहा है। ऐसे में जैविक खेती की प्रचुर संभावनाएं हैं। 

UP सरकार ने किसान राहत पैकेज रिलीज किया, 300 करोड़ रुपये देने के निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को किसानों के लिए राहत पैकेज रिलीज किया है. किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 300 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया है. उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्ट‍ि ने फसल बर्बाद कर दी.

प्रभावित किसानों की मदद के लिए अब तक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. जिलाधिकारियों को टीआर 27 के तहत 370 करोड़ रुपये का आकस्मिक आहरण कर किसानों को प्राथमिकता पर मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.

शहरी परिवारों में बढ़ रहा है आर्गेनिक खेती का प्रचलन

आर्गेनिक खेती

 शहरों में रहने वाले लोग अब स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सजग है और एेसा लगता है उनके लिए ‘अपने लिए खाने के चीज उपजाआे’ नया मंत्र है। खुद का बगीचा विकसित करने वाले यह लोग अब आर्गेनिक खेती का विकल्प अपना रहे हैं।

करे साधुआ खेतवा ना बोवाई ?

करे साधुआ खेतवा ना बोवाई ?

है अपना हिन्दुस्तान कहाँ ? यह बसा हमारे गाँवों में ?

स्वर्ग से गाँव ?

शुद्ध ताज़ी हवा बहती है जहां.

गाँव के भोले भाले सीधे सादे लोग.

दूध दही की नदियां बहती हैं गाँवों में.

बेचारा किसान.

जी तोड़ .......हाड़ तोड़ मेहनत करके भी दाने दाने को मोहताज .....बेचारा किसान.

ये कुछ पसंदीदा डायलोग हैं हमारे लोगों के. यही लिखते पढ़ते देखते सुनते आये हैं हम लोग ........

अब मुझसे सुन लो ......

अब ना रहता हिन्दुस्तान गाँवों में .......भैया हिन्दुस्तान चला गया शहर के slums में ...... अब तो जो नकारे निकम्मे बेकार बौड़म पड़े हैं गाँव में.

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