ऐसे तैयार करें टमाटर की नर्सरी

नर्सरी के लिए एक मीटर चौड़ी व 3 मीटर लम्बी, 10 से 15 सेमी ऊंची क्यारियां बनाएं और 5 ग्राम ट्राइकोडरमा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। गर्मी की फसल के लिए दिसम्बर-जनवरी में तथा सर्दी की फसल के लिए सितम्बर माह में नर्सरी लगाएं। एक हेक्टेयर में पौध रोपण हेतु 400 से 500 ग्राम बीज तथा संकर किस्मों के लिए 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर उपयुक्त रहती है।

पॉली हाउस से किसानों की आय में हुई वृद्धि

परम्परागत खेती से बढ़कर विदेशी तरीके से खेती करने से किसानों को अधिक लाभ होता नजर आ रहा है । किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है । इंडो-इस्राइल तकनीक ने किसानों को सब्जी की खेती करने के लिए नई राह दिखाई है । हरियाणा में जहाँ किसान पिछले वर्ष दो एकड़ में इस तकनीक से सब्जी उगाते थे वही आज 20 एकड़ में यही कार्य कर रहे है । पॉली हाउस के माध्यम से यह लाभ किसान उठा रहे है ।

 

ढैंचा की खेती बढ़ाये खेतों में पोषक तत्व

जमीन कि उर्वरक शक्ती को बंधने के लिये और उसका लाभ किसानो को पहुचाने के लिये कृषि विज्ञान केंद्र हरसंभव कोशिश करता है| उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कृषी विज्ञान केंद्र ढैंचा (हरी खाद) की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों से10 एकड़ में इसकी खेती करने का प्रयोग कर रहे है|

 

केंचुआ खाद से मिट्टी की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

रासायनिक खादों के बुरे असर से निजात दिलाने के लिए  किसानों को केंचुए से बनी खाद(जेविक खाद ) का प्रयोग करना चाहिए !किसानों को जैविक खाद के बारे में उपयोगी जानकारी लेनी चाहिये क्योकि इससे रोजगार के नए मौके मुहैया होंगे। केंचुआ खाद समय की मांग है ! रासायनिक उर्वरकों की वजह से भूमि की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, लेकिन केंचुआ खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।

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