जैविक कीटनाशक अपनाकर पानी प्रदूषण से बचाएं

हम जिस गाँव में रहते हैं वैसे ही लगभग एक लाख गाँव पूरे उत्तर प्रदेश में है जिनमें तेरह करोड़ से भी ज्यादा लोग रहते हैं और इनमें से दस करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन पूर्णत: खेती पर ही आधारित है। इनमें से अधिकांश किसान तथा खेतिहर मजदूर हैं हमारे सारे किसान मिलकर पूरे देश की आवश्यकताओं का एक बटे पाँचवाँ भाग तो खुद ही पूरा करते हैं। 

गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेषों को खेतों में न जलाये

गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेषों को खेतों में न जलाये

आधुनिक तकनीक का कृषि में समझदारी से उपयोग करना बहुत जरुरी है। जैसे मजदूरों की कमी के विकल्प के तौर पर आई कंबाइन मशीन वर्तमान में खेती के लिए घातक बनती जा रही है। किसानों द्वारा गेहूं की कटाई के बाद बची पराती को खेतों में जलाया जाता है। जिससे मृदा के पोषक तत्व नष्ट हो जाते है और धुएं से निकलती जहरीली गैसें पर्यावरण को प्रदूषित कर देती है।

आज भी हलधर ही है किसान

भगवान कृष्ण के भाई थे बलराम उनका अस्त्र था हल इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है. मान्यता अनुसार आज से लगभग 5 से 7 हजार वर्ष पूर्व उनका जन्म हुआ था. यूं तो कृषि के क्षेत्र में कहने के लिए हमने बहुत विकास कर लिया है परन्तु आज तक जिस हल के साथ बलराम की फोटो दिखाई जाती है उसी प्रकार के हल से आज भी हमारे किसान बैलो के साथ लगाकर खेत की जुताई करते है.

उत्तर प्रदेश के 37 जिलों की 50 फीसदी फसल बर्बाद

बारिश और ओलावृष्टि से सूबे के आधे जिलों की आधी से ज्यादा फसलें चौपट हो गई हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर अब तक हुए मौका मुआयना के बाद जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें सूबे के 37 जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई है।

इसमें अवध के अंबेडकरनगर और बाराबंकी भी शामिल हैं। आधे से ज्यादा नुकसान वाले जिलों की संख्या अभी बढ़ सकती है क्योंकि अवध के ज्यादातर जिलों की रिपोर्ट कृषि मुख्यालय को अभी तक नहीं मिली है।

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