क्या किसानों की आय दुगनी होगी?

क्या किसानों की आय दुगनी होगी?

क्या किसानों की आय दुगनी होगी?

 दावे के अनुसार किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करना कठिन लक्ष्य है.महंगाई को समायोजित करने के बाद देश के किसानों की आय 2003 से 2013 के बीच एक दशक में सालाना पांच फीसदी की दर से बढ़ी. इसे देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगले पांच साल में किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा पर संदेह होता है.

किसान हितैषी और समस्त विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत थे अटल जी : डॉ आर के सिंह

किसान हितैषी और समस्त विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत  थे अटल जी : डॉ आर के सिंह

अटल जी एक नेता ही नहीं बल्कि समाज सुधारक, कुशल प्रशासक, कुशल वक्ता तथा सम्पूर्ण विश्व के नेता थे।उन्होंने जीवन के किसी भी पड़ाव पर हार नहीं मानी ।
अपने बचपन के समय में ही मैने अटल जी की सभाओं में उन्हें सुना था, उनसे मुलाकात की थी, उस समय मेरी आयु 12 वर्ष की थी जब अटल जी से मुलाकात की थी मैंने जैसे ही उन्हें चरण स्पर्श किये उन्होंने मुझे गले लगा कर कहा कि आप आगामी नेता हो देश को आपकी जरूरत है आगे बढ़ कर देश को संभालने का काम करो ।उस समय मेरी समझ में कुछ नहीं आया था।उसके कुछ समय बाद ही भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। कुछ सालों के बाद अटल जी के नेतृत्व मे भाजपा ने सरकार बनाई।

कहां खो गई हम किसानों की स्वाधीनता

कहां खो गई हम किसानों की स्वाधीनता

वैश्विक तापवृद्धि, जलवायु परिवर्तन, कुदरती आपदाओं में इजाफा और बढ़ती लागत के चलते खेती पहले से ही घाटे का सौदा है। लेकिन, अब मुक्त व्यापार नीतियों के तहत सस्ते कृषि उत्पादों का बढ़ता आयात किसानों को गहरे संकट में डाल रहा है। इससे न केवल बढ़ती आबादी के अनुरूप खाद्यान्न उत्पादन में बढोतरी की रफ्तार धीमी पड़ गई है। बल्कि, सरकारी कोशिशों के बावजूद किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत नहीं मिल पा रही है। इसका सीधा असर प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उपलब्धता और किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि देश 70 वां स्वाधीनता दिवस मना रहा है। जिस उदारीकरण की नीतियों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान माना

हमे बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया इन रासायनिक खादों ने :गिरिजा कान्त सिंह

हमे बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया इन रासायनिक खादों ने ऐसे शव्दों को न्यूट्रीवर्ड कम्पनी के डायरेक्टर  श्री गिरिजा कान्त सिंह जी ने ।उन्होंने फसल में लगातार बदने बाले उर्वरकों के प्रति चिन्ता जाहिर की उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का  प्रयोग वर्ष प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है। उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशको का चलन हरित क्रांति में किया गया।हमारे प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन जी ने रासानिक खादों और संकर प्रजाति के बीजों की वकालत की। जिसकी  कीमत अव हमारे देश के किसान चुका रहे हैं ,उन्होंने साथ ही यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग पर चिन्ता जाहिर की साथ ही उन्हो

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