मृदा संरक्षण

मृदा संरक्षण (Soil Conservation)

मिट्टी एक अमूल्य प्राकृतिक संसाधन है, जिस पर संपूर्ण प्राणि जगत निर्भर है । भारत जैसे कृषि प्रधान देश में; जहाँ मृदा अपरदन की गंभीर समस्या है, मृदा संरक्षण एक अनिवार्य एवं अत्याज्य कार्य है। मृदा संरक्षण एक प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत न केवल मृदा की गुणवत्ता को बनाये रखने का प्रयास किया जाता है, बल्कि उसमें सुधार की भी कोशिश की जाती है । मृदा संरक्षण की दो विधियाँ हैं -

क) जैवीय विधि ब) यांत्रिक विधि ।

डायनासोर के समान इंसान भी विलुप्त हो जाएंगे : अमित बमोरिया

डायनासोर के समान इंसान भी विलुप्त हो जाएंगे : अमित बमोरिया

खेती में कीटनाशकों का भयावह उपयोग, अधिक पैदावारी के लिए यूरिया, डीएपी की अधिकता, नरवाई की आग, सबकुछ जीवों के लिए प्रतिकूल है। पक्षियों में इसका असर दिखाई देने लगा है। वह दिन दूर नहीं, जब इंसान भी डायनासोर के समान विलुप्त हो जाएंगे। मोती की खेती करने वाले अमित बमोरिया ने किसान कल्याण सम्मेलन में बुधवार को बात कहीं।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री  माननीय  शिवराज सिंह चौहान  जी के हांथो से पुरुस्कार पाने वाले  मड़ई के पास कामती रंगपुर के ने भविष्य की महामारी की आशंका व्यक्त की , बमोरिया ने कहा खेती में कीटनाशकों का भयावह उपयोग, अधिक पैदावारी के लिए यूरिया, डीएपी की अधिकता, सबकुछ जीवों के लि

सिट्रोनेला (जावा घास) की खेती

सुगंधित पौधों के वर्ग में मुख्य रूप से जो पौधे हैं, वे हैं – लेमन ग्रास, सिट्रोनेला, तुलसी, जिरेनियम पामारोजा/रोशाग्रास। नींबू घास की दो प्रजातियाँ – सी. फ्लेसुसोयम – भारत में पाई जाती है, जबकि सी. स्टेरिट्स – दक्षिणी पूर्वी देशों में पाई जाती है।

गेहूं की कटाई के बाद तैयार करें हरी खाद

गेहूं की कटाई के बाद किसान को खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद तैयार करनी चाहिये।गेहूं 30 अप्रैल तक पूरी तरह से कट जाएगा। इसके बाद ज्यादातर खेत खाली पड़े रहते है। जिसमें किसान ढैंचा, सन, आदि की उपज लेकर हरी खाद ले सकते हैं। किसान भाई तीसरी फसल के रूप में मूंग (दलहन) की खेती कर सकते है। यह फसल 65-70 दिनों में तैयार हो जाती है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। इस दौरान किसान चाहे तो तीसरी फसल के रूप में सूरजमुखी (तिलहन) की खेती कर सकते है।

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