Organic Farming

टमाटर की खेती भी आजमायें किसान

सब्जियों में टमाटर का प्रमुख स्थान है। इसके फलों को विभिन्न प्रकार से उपयोग में लिया जाता है। इसकी खेती वर्ष भर की जा सकती है। टमाटर में विटामिन ‘ए’ ‘सी’ की मात्रा अधिक होती है। इसका उपयोग ताजा फल के रूप में तथा उन्हें पकाकर डिब्बाबंदी करके, अचार, चटनी, सूप, केचप सॉस आदि बनाकर भी किया जाता है। टमाटर में लाल रंग लाइकोपीन नामक पदार्थ से होता है जिसे दुनिया का प्रमुख एन्टिऑक्सीडेन्ट माना गया है।

फसलों में सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों का विशेष महत्व

अधिक उत्‍पादन प्राप्‍त करने के कारण भूमि में पोषक तत्‍वों के लगातार इस्‍तेमाल से सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों की कमी दिनोदिन

क्रमश: बढती जा रही है। किसान मुख्‍य पोषक तत्‍वों का उपयोग फलसों में अधिकांशत: करते है एवं सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों का

लगभग नगण्‍य उपयोग

होने की वजह से कुछ वर्षो से भूमि में सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों की कमी के लक्ष्‍ण पौधों पर दिखाई दे रहे है। पौधों में सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों की कमी होने पर

उसके लक्ष्‍ण पौधों में प्रत्‍यक्ष रूप से दिखाई देने लगते है। इन पोषक तत्‍वों की कमी केवल इन्‍हीं के द्वारा पूर्ति करके की जा सकती है।

जैविक कृषि और ग्रामीण स्वावलंबन

भारत गांवों का देश है जहां कि 70 प्रतिशत जनसंख्या आज भी गांवों में रहती है। यह ठीक है कि भूमंडलीकरण तथा उदारीकरण अर्थव्यवस्था में ग्रामीण जनता का शहरों की तरफ बहुत तेजी से पलायन हो रहा है तथा हो चुका है। इसका मतलब यह नहीं है कि देश की छह लाख से ज्यादा जनसंख्या गांवों में से समाप्त हो चुकी है। यह ठीक है कि विकास के नाम पर गांवों को शहरों के रूप में बदलने का प्रयास अनवरत जारी है तथा दिल्ली-एन सी आर जैसे शहरों का बहुत तेजी से विकास हुआ है। जहां पर विकास के नाम पर नंदीग्राम तथा सिगुर जैसे विवादित स्थल भारतीय क्षितिज पर दिखाई दे रहे हैं वहीं पर झारखंड, छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा के ऐसे गांव दिखाई पड़

रासायनिक खाद से जमीन में घुलता जहर

देश में हरित क्रांति आने की वजह से रासायनिक खाद के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है और किसानों के मित्र कहे जाने वाले कीड़े, केंचुएं खत्म हो रहे हैं। कृषिभूमि को धीरे-धीरे रसायनों की लत से मुक्त कर हमें अपने देश में उपलब्ध जैविक खाद का भरपूर उपयोग करना होगा और किसानों को इस कार्य के लिए तकनीकी और आर्थिक सहायता देनी होगी जिससे हमारे कृषिभूमि के साथ नदी, तालाब का पानी जहर होने से बच जाए।

जैविक बनाम रासायनिक खेती

आमतौर पर यह माना जाता है कि ज़्यादा मात्रा में रासायनिक खाद एवं कीटनाशक इस्तेमाल करने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और उत्पादन बढ़ने से किसान का मुना़फा बढ़ सकता है. सरकार भी किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने की सलाह देती है, लेकिन इस वैज्ञानिक विधि का अर्थ स़िर्फ और स़िर्फ रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल तक ही सीमित होता है. नतीजतन आए दिन हम विदर्भ, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा आत्महत्या करने की ख़बरें सुनते रहते हैं.

आर्थिक लाभ का साधन है गन्ने की पेड़ी फसल

   एक बार बोए गये गन्ने की फसल  काट लेने के उपरान्त उसी गन्ने से दूसरी फसल लेने के प्रक्रिया को  पेड़ी कहते है । गन्ने की रोपी गई फसल की कटाई के उपरान्त उसी खेत में रोपित फसल की जड़ों से गन्ने के नये पौधे निकलते है। इससे गन्ने की जो फसल प्राप्त होती है उसे गन्ने की पेड़ी या जड़ी (रेटून) कहते है । आमतौर पर गन्ने की फसल से एक या दो पेड़ी की फसल अवश्य लेंना चाहिए। देश में लगभग दो तिहाई क्षेत्र में पेड़ी की फसल  ली जाती है।  पेड़ी रखने से खेत की तैयारी, बीज एवं बुवाई का खर्च, श्रम एवं समय की बचत ह¨ती है । अतः पेड़ी फसल का उत्पादन व्यय कम आता है । पेड़ी फसल अपेक्षाकृत कम समय में पककर तैयार ह¨ जाती है जिस

केंचुआ खाद बनाना वर्मी कम्पोस्टिंग

 वर्मी कम्पोस्ट को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही साथ फसलों की पैदावार व गुणवत्ता में भी बढ़ोत्तरी होती है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मृदा पर होने वाले दुष्प्रभावों का वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से सुधार होता है। इस प्रकार वर्मी कम्पोस्ट भूमि की भौतिक, रासायनिक व जैविक दशा में सुधार कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को टिकाऊ करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। अनुमानत: 1 कि.ग्रा.

कचरे से तैयार करें उत्तम खाद

अधिकांश किसानों के बाड़ी या प्रक्षेत्र में स्वनिर्मित खाद के गड्ढे होते हैं। कृषक इस गड्ढे का उपयोग खाद बनाने में करते हैं। यहां घर के अपशिष्ट और फार्म के कचरे का इस्तेमाल खाद बनाने में करते हैं। ठीक प्रकार से न सड़ने के कारण उसमें खरपतवार के बीज और निमेटोड पाए जाते हैं, जो फसलों के लिए नुकसानदेह हैं। खाद बनाते समय इसे खुला छोड़ दिया जाता है और अत्यधिक गर्मी और बारिश से बचाव की सुविधा नहीं होती है। इन कचरों का उपयोग व्यवस्थित और वैज्ञानिक रीति से न होने के कारण खाद की गुणवत्ता निम्न स्तर की होती है, जिसमें जीवांश और पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है। किसान बहुत कम खर्चे में स्वयं जैविक खादों

कीटनाशक के छिड़काव से फसलों को नुकसान

रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध व असंतुलित प्रयोग से पर्यावरणीय असंतुलन व प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होने के साथ ही खेतों में पाये जाने वाले मित्र कीट भी अनजाने में मारे जाते हैं। मित्र कीट फसल की शत्रु कीटों से रक्षा करते हैं। किसान आमतौर पर यह जानते हैं कि फसलों को कीट नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन बहुत कम किसानों को यह जानकारी है कि खेतों में मित्र कीट भी होते हैं और रासायनिक कीट नाशक का छिड़काव करने से वे मर जाते हैं। मित्र कीट फसल के लिए काफी लाभदायक होते हैं। अगर मित्र कीटों को संरक्षित किया जाए तो फसलों में हानिकारक कीटों की रोकथाम पर होने वाले खर्च में काफी कमी आ सकती है। कृषि विभाग भी ए

भूमि प्रदूषण

सामान्य स्थिति में भूमि मूल जीवनदायी है, किंतु प्रदूषण की स्थिति में भूमि में हानिकारक अवांछनीय पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है। प्रदूषित जल एवं कचरा इसके प्रमुख कारण हैं।
 

भूमि प्रदूषण के कारण-

1. औद्योगिक कचरा,
2. घरेलू कचरा,
3. कीटनाशक, खरपतवार नाशक,
4. नाभिकीय परीक्षण/ परमाणु विस्फोट।
 

प्रभाव

1. भूमि की ऊर्वरता कम या नष्ट हो जाती है।
2. उत्पन्न पौधे, औषधियां विषाक्त हो जाती हैं।
3. भूमि पर प्रवाहित जल एवं उसके द्वारा भू-गर्भ तक पहुंचने वाला जल भी प्रदूषित हो जाता है।

Author: स्वराज तिवारी

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