Organic Farming

जैविक खेती एक विकल्प -

जैविक खेती एक ऐसी पद्धति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों तथा खरपतवारनाशियों के स्थान पर जीवांश खाद पोषक तत्वों (गोबर की खाद कम्पोस्ट, हरी खाद, जीवणु कल्चर, जैविक खाद आदि) जैव नाशियों (बायो-पैस्टीसाईड) व बायो एजैन्ट जैसे क्राईसोपा आदि का उपयोग किया जाता है, जिससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता तथा कृषि लागत घटने व उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ने से कृषक को अधिक लाभ भी मिलता है । 

कीट आर्कषित फसल लगायें, फसलों को हानिकारक कीटों से बचायें

फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों में कीटों की भूमिका अहम रहती है। विभिन्न प्रकार के कीटों की जातिया जैसे- काटने चबाने वाले इल्ल्यिा, तनाछेदक, बीटल व चूसने वाले कीट जैसे-माहो, थ्रिप्स, लीफ हापर आदि अपने मुख के विभिन्न भागों से फलों, सब्जियों एवं खाघानों को चूसकर, कुतरकर, खाकर एवं उसमें घुसकर हानिकारक पदार्थ छोडतें है, जिससे फसल तो खराब होती ही है साथ ही उसकी गुणवत्ता व बाजार मूल्य कम हो जाती है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पडता है।

लाभकारी है तरबूज की खेती

 तरबूज की खेती शुरू करने के लिए यह सही समय है। किसान तरावट देने वाले तरबूज की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। गर्मियों में इसकी मांग भी ज्य़ादा रहती है जिससे किसान बढिय़ा मुनाफा कमा सकता है।

भूमि एवं जलवायु

फसल को कीटों के प्रकोप से बचाएं

गेहूं की बाली बनने के समय पर सिंचाई का विशेष ध्यान रखें किसान

लखनऊ। सामान्य समय पर बोए गए गेहूं में अब बाली बनने का समय है ऐसे में किसान सिंचाई का विशेष ध्यान रखें। यह सुझाव उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित फसल मौसम सतर्कता समूह के में दिये गये। इनके सुझाव अनुसार दलहन में कीट प्रकोप के प्रति किसान सचेत रहें और लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार करें।

बारिश से उड़द की फसल पर कीट प्रकोप की आशंका

इससीजन में बेमौसम बारिश से किसान चिंतित नजर रहे हैं। उड़द की फसल पक चुकी है। कई स्थानों में फसल पकने की स्थिति में है। ऐसे में हो रही बारिश और छाए बादलों फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कहीं-कहीं फसल में कीट का प्रकोप भी शुरू हो गया है। 

दलहन-तिलहन फसलों पर कीटों का प्रकोप

खराब मौसम की मार अब दलहन, तिलहन व सब्जी की खेती पर पड़ने लगी है। मसूर, अरहर, चना, तिवड़ा, मटर की फसलों में तना छेदक का प्रकोप बढ़ गया है। सरसों, अलसी व कुसुम जैसी तिलहनी फसलों पर मैनी (कीट) का हमला शुरू हो गया है। सब्जी में कीड़े लगने लगे हैं।

हरी खाद - मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढाने का एक सस्ता विकल्प

   मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाये रखने के लिए हरी खाद एक सस्ता विकल्प है । सही समय पर फलीदार पौधे की खड़ी फसल को मिट्टी में ट्रेक्टर से हल चला कर दबा देने से जो खाद बनती है उसको हरी खाद कहते हैं 

आदर्श हरी खाद में निम्नलिखित गुण 

• उगाने का न्यूनतम खर्च

•  न्यूनतम सिंचाई आवश्यकता

•   कम से कम पादम संरक्षण

•   कम समय में अधिक मात्रा में हरी खाद प्रदान कर सक

• विपरीत परिस्थितियों  में भी उगने की क्षमता हो

गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट और उनका प्रबंधन

डाइमण्ड बैक मौथकोल फसलों की सफल खेती में होने वाले पतझड़ के लिए जिम्मेदार एक सर्वदेशीय प्रमुख सुंडी है। युवा सुंडी देखने में क्रीमी - हरे रंग की तथा इसके हरे ऊतकों को खाने बे बाद पत्तों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं । बाद में जबकि, बड़े होकर सुंडी पत्तियों में छेद बना देती है और परिणामस्वरूप फसल में पतझड़ का कारण बनाता है जिससे विशाल नुकसान होता है ।

प्रबंधन

पर्यावरण के लिए बेहतरीन जैविक खेती

आज भारत में 5.38 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है. उम्मीद है कि साल 2012 तक जैविक खेती का फसल क्षेत्र 20 लाख हैक्टेयर को पार कर जाएगा.

वर्ष 2003 में देश में सिर्फ 73 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही थी, जो 2007 में बढ़कर 2.27 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गई.

इस तरह जैविक उत्पाद का बाजार अगले पांच साल में 6.7 गुना बढ़ने की उम्मीद है. तब दुनिया के कुल जैविक उत्पाद में भारत की भागीदारी करीब 2.5 फीसदी की हो जाएगी.

हरित क्रांति

फरवरी माह के खेती के प्रमुख कार्य

बौने गेहूं में उर्वरक की आखरी मात्रा देकर सिंचाई करते हैं।
सूर्यमुखी के खेत से खर पतवारों को हटा कर मिट्टी चढ़ाई जाती है।
गन्ने के स्वस्थ बीज का चुनाव कर बीजोपचार किया जाता है।
बरसीम घास की कटाई 20 से 25 दिनों के अन्तर में की जाती है।
बरसीम, चटी के लिये मक्का, ज्वार, लोबिया और मक्का मिलाकर बोते हैं।
सरसों, अलसी को काट लिया जाता है, नहीं तो ज्यादा पक जायेगा और बीज छिटकने लगेंगे।
और लहसुन के खेतों में गुड़ाई करने के बाद मिट्टी चढ़ाते हैं।
आलू की खुदाई करते हैं। जाड़े के फूलों के बीज एकत्र करते हैं। गर्मियों के फलों के बीजों की बुवाई की जाती है।

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