Organic Farming

लाभकारी है तरबूज की खेती

 तरबूज की खेती शुरू करने के लिए यह सही समय है। किसान तरावट देने वाले तरबूज की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। गर्मियों में इसकी मांग भी ज्य़ादा रहती है जिससे किसान बढिय़ा मुनाफा कमा सकता है।

भूमि एवं जलवायु

फसल को कीटों के प्रकोप से बचाएं

गेहूं की बाली बनने के समय पर सिंचाई का विशेष ध्यान रखें किसान

लखनऊ। सामान्य समय पर बोए गए गेहूं में अब बाली बनने का समय है ऐसे में किसान सिंचाई का विशेष ध्यान रखें। यह सुझाव उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित फसल मौसम सतर्कता समूह के में दिये गये। इनके सुझाव अनुसार दलहन में कीट प्रकोप के प्रति किसान सचेत रहें और लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार करें।

बारिश से उड़द की फसल पर कीट प्रकोप की आशंका

इससीजन में बेमौसम बारिश से किसान चिंतित नजर रहे हैं। उड़द की फसल पक चुकी है। कई स्थानों में फसल पकने की स्थिति में है। ऐसे में हो रही बारिश और छाए बादलों फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कहीं-कहीं फसल में कीट का प्रकोप भी शुरू हो गया है। 

दलहन-तिलहन फसलों पर कीटों का प्रकोप

खराब मौसम की मार अब दलहन, तिलहन व सब्जी की खेती पर पड़ने लगी है। मसूर, अरहर, चना, तिवड़ा, मटर की फसलों में तना छेदक का प्रकोप बढ़ गया है। सरसों, अलसी व कुसुम जैसी तिलहनी फसलों पर मैनी (कीट) का हमला शुरू हो गया है। सब्जी में कीड़े लगने लगे हैं।

हरी खाद - मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढाने का एक सस्ता विकल्प

   मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाये रखने के लिए हरी खाद एक सस्ता विकल्प है । सही समय पर फलीदार पौधे की खड़ी फसल को मिट्टी में ट्रेक्टर से हल चला कर दबा देने से जो खाद बनती है उसको हरी खाद कहते हैं 

आदर्श हरी खाद में निम्नलिखित गुण 

• उगाने का न्यूनतम खर्च

•  न्यूनतम सिंचाई आवश्यकता

•   कम से कम पादम संरक्षण

•   कम समय में अधिक मात्रा में हरी खाद प्रदान कर सक

• विपरीत परिस्थितियों  में भी उगने की क्षमता हो

गोभी वर्गीय सब्जियों के कीट और उनका प्रबंधन

डाइमण्ड बैक मौथकोल फसलों की सफल खेती में होने वाले पतझड़ के लिए जिम्मेदार एक सर्वदेशीय प्रमुख सुंडी है। युवा सुंडी देखने में क्रीमी - हरे रंग की तथा इसके हरे ऊतकों को खाने बे बाद पत्तों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं । बाद में जबकि, बड़े होकर सुंडी पत्तियों में छेद बना देती है और परिणामस्वरूप फसल में पतझड़ का कारण बनाता है जिससे विशाल नुकसान होता है ।

प्रबंधन

पर्यावरण के लिए बेहतरीन जैविक खेती

आज भारत में 5.38 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है. उम्मीद है कि साल 2012 तक जैविक खेती का फसल क्षेत्र 20 लाख हैक्टेयर को पार कर जाएगा.

वर्ष 2003 में देश में सिर्फ 73 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही थी, जो 2007 में बढ़कर 2.27 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गई.

इस तरह जैविक उत्पाद का बाजार अगले पांच साल में 6.7 गुना बढ़ने की उम्मीद है. तब दुनिया के कुल जैविक उत्पाद में भारत की भागीदारी करीब 2.5 फीसदी की हो जाएगी.

हरित क्रांति

फरवरी माह के खेती के प्रमुख कार्य

बौने गेहूं में उर्वरक की आखरी मात्रा देकर सिंचाई करते हैं।
सूर्यमुखी के खेत से खर पतवारों को हटा कर मिट्टी चढ़ाई जाती है।
गन्ने के स्वस्थ बीज का चुनाव कर बीजोपचार किया जाता है।
बरसीम घास की कटाई 20 से 25 दिनों के अन्तर में की जाती है।
बरसीम, चटी के लिये मक्का, ज्वार, लोबिया और मक्का मिलाकर बोते हैं।
सरसों, अलसी को काट लिया जाता है, नहीं तो ज्यादा पक जायेगा और बीज छिटकने लगेंगे।
और लहसुन के खेतों में गुड़ाई करने के बाद मिट्टी चढ़ाते हैं।
आलू की खुदाई करते हैं। जाड़े के फूलों के बीज एकत्र करते हैं। गर्मियों के फलों के बीजों की बुवाई की जाती है।

धान-गेहूं की लगातार खेती बिगाड़ रही मिट्टी की सेहत

दोनों ही फसलें मिट्टी से एक ही जैसे सूक्ष्मतत्वों को ग्रहण करती हैं, लगातार इनकी खेती से मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी हो जाती है।

क्या है जैविक खेती

वर्मी कंपोस्ट : वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद का ही एक रूप है. इसे बनाने के लिए दस बाई तीन फीट आकार का एक प्लेटफार्म किसी पेड़ या छायादार जगह के नीचे बनाया जाता है. प्लेटफार्म को ज़मीन की सतह से ऊंचा रखा जाता है. प्लेटफार्म को डेढ़ फीट ऊंचा करके जालीनुमा बना दिया जाता है. पक्के प्लेटफार्म की सतह पर एक-डेढ़ इंच मोटी मिट्टी की परत डाल दी जाती है. मिट्टी की परत के बाद छह इंच मोटी हरी एवं सूखी घास या फूस की परत चढ़ाई जाती है. गोबर की छह इंच मोटी परत के बाद हल्की मिट्टी छिड़क दी जाती है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक़, एक क्यूबिक मीटर में पांच सौ केचुए छोड़ने चाहिए.

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