किसान

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से सम्बंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है जो लोग कृषि के कार्य को करके अपनी जीविका उपार्जन करते है उन्हें किसान कहते है 
किसानो को निम्न बिन्दुओ से भी जाना जा सकता है 

1. जो फसलें उगाते हैं।

2. कृषक (farmer)

3. खेतिहर – खेती करने वाला।

4. जो खेत और फसल में अपना योगदान देते हैं।

5. जिनके पास स्वयं के खेत है और दूसरे कामगारों से काम करवाते हैं, किसान हैं।

6. किसान खेतों में पसीना बहाकर अन्न उपजाते हैं

किसानों के लिए कम प्रीमियम पर मिलेगा फसल बीमा योजना

किसानों के लिए कम प्रीमियम पर मिलेगा फसल बीमा योजना

बुधवार को कैबिनेट की बैठक के बाद नई फसल बीमा योजना को मंजूरी मिल गई है। इस योजना को मंजूरी मिलने के साथ इस योजना से किसानों पर प्रीमियम का भार कम पड़ेगा साथ ही नुकसान को दावों पर भी तेजी से निपटारा किया जा सकेगा। इसके तहत फसल का नुकसान होने पर किसानों को दावे की 25 फीसदी राशि तुरंत मिल जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई बिलों पर चर्चा हुई जिसमें से नई फसल बीमा योजना सबसे अहम है। इसमें किसानों को राशि का सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सा देना होगा और फसल का नुकसान होने पर 25 फीसदी राशि तुंरत मिल जाएगी।

देसी बीज बचाने के लिए राष्ट्रीय बीज बैंक बनाना जरूरी

देसी बीज बचाने के लिए राष्ट्रीय बीज बैंक बनाना जरूरी

देश की कृषि को बचाना है तो हमारे देसी बीजों को बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार को राष्ट्रीय बीज बैंक बनाना चाहिए। भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के अधिवेशन में रविवार को यह मांग उठी।

रबी खेती पर छाया खतरा सरकार गंभीर

रबी खेती पर छाया खतरा सरकार गंभीर

दिसंबर के आखिरी दिनों में तापमान में ये उछाल और मौसम में गर्मी का अहसास किसानों के साथ आम जन के लिए चिंता का विषय बन गया है। मौसम विभाग के अनुसान जनवरी के पहले सप्ताह में तेज ठंड की उम्मीद नहीं है। 

गेहूं के लिए नुकसान
इन दिनों खेतों में खड़ी गेहूं की फसल के लिए तापमान की यह तेजी नुकसान का कारण बन सकती है। बढ़वार पर आई फसल के लिए अधिक तापमान नुकसान का कारण बन सकता है। जहां पहले बोवनी हो गई थी और फसल अधिक बड़ी हो गई है, उसके लिए और भी अधिक नुकसान होगा। 

बीज, खाद का लाइसेंस के लिए अब एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स होना जरूरी

बीज, खाद का लाइसेंस के लिए अब एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स होना जरूरी

अब कृषि विषय से स्नातक कर चुके लोगों को ही बीज, उर्वरक और कीटनाशक का लाइसेंस दिया जाएगा। पूर्व की भांति अब हर किसी को लाइसेंस नहीं मिल सकेंगे।

गौरतलब हो कि अब से पूर्व कोई भी व्यक्ति कृषि विभाग से बीज, उर्वरक, कीटनाशक बिक्री का लाइसेंस बनवा लिया करते थे। जानकारी के अभाव में वह किसानों को गलत दवाएं भी दे देते थे। 

ऐसे में किसानों की फसल रोग मुक्त होने के बजाय खराब हो जाती थी। किसान कृषि विभाग में हंगामा करते थे। लेकिन अब ऐसे लोगों को कृषि विभाग से लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकेगा। 

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