उर्वरक

फ़्रांस के कृषि वैज्ञानिकों ने पता लगाया की पौधों के विकास के लिए मात्र तीन तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटास की अधिक आवश्यकता होती है अत: उनके अनुसार ये तीन तत्व पौधों को दी हैं तो पौधों का अच्छा विकास एवं अच्छी उपज प्राप्त हो सकती है १८४० में जर्मन वैज्ञानिक लिबिक ने इन तीनों के रासायनिक संगठक एन पी के खाद बनाकर फसलों की बढ़वार के लिए इस रसायन को भूमि पर डालने के लिए प्रोत्साहित किया

सरकार ने बढ़ाई उर्वरक सब्सिडी, सीधे किसानों को मिलेगा फायदा

सरकार ने बढ़ाई उर्वरक सब्सिडी, सीधे किसानों को मिलेगा फायदा

पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें वित्त वर्ष 2019-20 के लिए गैर यूरिया आधारित उर्वरकों (फॉस्‍फेटिक और पोटाशिक) की सब्सिडी को बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इसके तहत सरकार की तरफ से 22,875 करोड़ रुपए खर्च की इजाजत दी गई।

उर्वरक सब्सिडी का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। हालांकि प्रतिकिलो सब्सिडी दरें वही रहेंगी जैसी वर्ष 2018-19 में थी। सरकार की तरफ से सब्सिडी की शुरुआत 2010 में की गई थी। इसके तहत सब्सिडी वाले फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के प्रत्येक ग्रेड पर एक निश्चित राशि सब्सिडी के तौर पर दी जाती है। यह सब्सिडी सालाना आधार पर दी जाती है।

मटर की बुवाई का सही समय

मटर की बुवाई का सही समय

शीतकालीन सब्जियों में मटर की सबसे ज्यादा मांग होती है। आजकल मटर की डिब्बा बंदी भी काफी लोकप्रिय है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम एवं विटामिन्स पाया जाता है। देश भर मे इसकी खेती व्यावसायिक रूप से की जाती है।

खेत की तैयारी

सब्जी मटर के लिए बलुई दोमट सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यह भी ध्यान रहे कि खेत में जल निकास का अच्छा प्रबन्ध हो और भूमि का पीएच मान 6-7 के बीच हो। पहले मिट्टी पलटने वाले हल से तथा बाद में देसी हल से खेत की जोताई कर पाटा चलाए।

बुवाई का समय

बीज, खाद का लाइसेंस के लिए अब एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स होना जरूरी

बीज, खाद का लाइसेंस के लिए अब एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स होना जरूरी

अब कृषि विषय से स्नातक कर चुके लोगों को ही बीज, उर्वरक और कीटनाशक का लाइसेंस दिया जाएगा। पूर्व की भांति अब हर किसी को लाइसेंस नहीं मिल सकेंगे।

गौरतलब हो कि अब से पूर्व कोई भी व्यक्ति कृषि विभाग से बीज, उर्वरक, कीटनाशक बिक्री का लाइसेंस बनवा लिया करते थे। जानकारी के अभाव में वह किसानों को गलत दवाएं भी दे देते थे। 

ऐसे में किसानों की फसल रोग मुक्त होने के बजाय खराब हो जाती थी। किसान कृषि विभाग में हंगामा करते थे। लेकिन अब ऐसे लोगों को कृषि विभाग से लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकेगा।