किसान आत्महत्या

भारत में किसान आत्महत्या १९९० के बाद पैदा हुई स्थिति है जिसमें प्रतिवर्ष दस हज़ार से अधिक किसानों के द्वारा आत्महत्या की रपटें दर्ज की गई है। १९९७ से २००६ के बीच १,६६,३०४ किसानों ने आत्महत्या की। भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानसून की असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियाँ, समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फँसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसानों ने आत्महत्याएँ की है।

किसानों का 579.03 करोड़ रुपये कर्ज हुआ माफ, 94 हजार से ज्यादा को मिला फायदा

किसानों का 579.03 करोड़ रुपये कर्ज हुआ माफ, 94 हजार से ज्यादा को मिला फायदा

मुख्यमंत्री फसली ऋण मोचन योजना संपन्न हो गई है। बिजनौर जिले के किसानों को इस योजना से बहुत फायदा हुआ है। जिले के किसानों का 579 करोड़ रुपये योजना में माफ हुआ है। योजना की केवल एक ही किस्त आनी बाकी है। इस योजना की वजह से जिले के 94 हजार से ज्यादा किसानों का कर्जा माफ हुआ है या उन्हें कर्ज माफी में मदद मिली है।

देश के 14.5 करोड़ किसानों को मोदी सरकार का तोहफा, अब सिर्फ 15 दिन में बनेगा किसान क्रेडिट कार्ड

देश के 14.5 करोड़ किसानों को मोदी सरकार का तोहफा, अब सिर्फ 15 दिन में बनेगा किसान क्रेडिट कार्ड

किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना ( Kisan Samman Nidhi Yojana ) की सौगात देने के बाद मोदी सरकार ( Modi govt ) देश के किसानों को क्रेडिट कार्ड ( Kisan Credit Card ) देने का फैसला किया है। सरकार ने देश के किसानों को साहूकार के द्वारा लगाए जाने वाले भारी ब्याज से बचाने के लिए यह अभियान शुरू किया है। सरकार के इस फैसले से किसानों की आय को बढ़ाया जा सकेगा। इसके साथ ही अगर किसानों के पास क्रेडिट कार्ड ( KCC ) होगा तो वह आसानी से कर्ज ले सकते हैं।

15 दिन में बनेगा KCC

राज्यों के सहयोग के बगैर कृषि क्षेत्र में सुधार संभव नहीं

राज्यों के सहयोग के बगैर कृषि क्षेत्र में सुधार संभव नहीं

कृषि क्षेत्र में सुधार की सख्त जरूरत है, जिसमें राज्यों का दायित्व ज्यादा है। कृषि को घाटे से उबारने और नई दिशा देने के लिए एक नई नीति की तत्काल जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर गठित मुख्यमंत्रियों की उप समिति ने बृहस्पतिवार को अपनी पहली बैठक में इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया। कृषि क्षेत्र में निवेश न होना सबसे बड़ा संकट है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।