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मिश्रित फायदे देती मिश्रित खेती

मिश्रित खेती से मतलब एक साथ खेत में कई फसलें उगाना है. आज यह आवश्यक है कि हमारे किसान मिश्रित खेती करें. मिश्रित खेती में मनुष्य, पशु, वृक्ष और भूमि सभी एक सूत्र में बंध जाते हैं. सिंचाई की सहायता से भूमि, मनुष्य और पशुओं के लाभ के लिए, फसलें और वृक्ष पैदा करती है और इसके बदले में मनुष्य और पशु खाद द्वारा भूमि को उर्वरक बनाते हैं. इस प्रकार की कृषि-व्यवस्था में प्रत्येक परिवार एक या दो गाय या भैंस, बैलों की जोड़ी और, यदि सम्भव हो तो, कुछ मुर्गियां भी पाल सकता है. थोड़ी सी भूमि में शाक-तरकारियां उगा सकता है, खेतों में अनाज आदि की फसलें पैदा कर सकता है और मेड़ों के सहारे घर-खर्च के लिए या बेचने के लिए फल देने वाले वृक्ष उगा सकता है. जहाँ संभव हो, किसान अपने फार्म में छोटे से कुंड में मछलियां भी पाल सकता है.

जहां पानी की कमी नहीं है, उन क्षेत्रों में पेड़-पौधे लगाने की योजना इस प्रकार हो सकती है- खेत की मेंड़ों के सहारे पीछे की ओर, शीशम जैसे इमारती लकड़ी के वृक्ष और बबूल, सामने की ओर कलमी आम, पपीता, अमरूद, नींबू और संतरा जैसे फलों के वृक्ष लगाने चाहिएं. कृषक परिवार के लिए स्वादिष्ट शाक-तरकारी के रूप में काम आने वाले कटहल के भी एक-दो वृक्ष उगाए जा सकते हैं. जितने वृक्षों के नाम बताए गए हैं, वे सभी बौने वृक्ष हैं, इनकी छाया थोड़ी होती है. इसलिए फसलों को इनसे किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती. दो वृक्ष ऐसे हैं जो प्राचीन काल से ही भारतीयों को बड़े प्रिय रहे हैं. घर के बगीचे में इन दोनों वृक्षों को लगाना सभी पसन्द करते हैं. ये दो वृक्ष हैं--बेल और आमला. बेल के फल पाचन-क्रिया, पेट के विकारों में, विशेषकर अतिसार और संग्रहणी जैसे रोगों में, अति लाभदायक समझे जाते हैं. आमले के फलों में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. आमलाआमले के फलों से चटनी और मुरब्बे तैयार किए जाते है.