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किसानों की खुदकुशी को रोकने के लिए मोदी सरकार द्वारा कई योजनाएं

मोदी सरकार ने किसानों के विकास के लिए अनेक कदम उठाएं हैं। किसानों की खुदकुशी को रोकने के लिए मोदी सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍यमंत्री साध्‍वी निरंजन ज्‍योति के साथ सरकार द्वारा उठाए गए अनेक कदमों पर मीडिया के साथ एक इंटरएक्टिव सेशन में प्रकाश डाला।

इस दौरान खाद्य आर्थिक व्यवस्था में खाद्य प्रसंस्‍करण के जरिए 32 लाख मीट्रिक टन क्षमता का सृजन किया गया। इसकी कीमत 9 हजार करोड़ रूपये है। इससे हर साल 9200 करोड़ रूपये कीमत की 10 प्रतिशत की दर से अपशिष्‍ट में कमी आयेगी।

उन्‍होंने बताया कि भारत खाद्य अपशिष्‍ट के क्षेत्र में शून्‍य टॉलरेंस से आगे बढ़ना शुरू किया। खाद्य क्षेत्र के सभी विभागों में शून्‍य टॉलरेंस अपशिष्‍ट की जरूरत पर बल देते है। श्रीमती बादल ने कहा कि मंत्रालय ने फल वाले क्षेत्र में अपशिष्‍ट को शून्‍य के स्‍तर तक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए उन्‍होंने भारत में स्‍वदेशी मल्‍टीब्रांड निर्माण रिटेल में शत प्रतिशत एफडीआई लाने के तरीके पर प्रकाश डाला। इसके जरियें 37 मेगाफूड पार्क और 134 कोल्‍ड चेन

परियोजनाएं बनाई गई। इसके साथ ही मंत्री महोदया ने घोषणा की कि चालू वित्‍त वर्ष में 100 कोल्‍ड चेन परियोजना और 'संपदा' योजना के तहत बाधारहित कृषि संकुल के विकास पर ध्‍यान दिया जाएगा, जो खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग को अगले स्‍तर तक ले जाएगा।

उन्‍होंने बताया कि सरकार ने 37 मेगाफूड पार्क बनाने की अनुमति दी है जिनमें 8 शुरू हो गई हैं। (6 एनडीए के 2 साल के कार्यकाल में और 2 यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में) मंजूर की गई 134 कोल्‍ड चेन परियोजनाओं में 81 पूरी हो गई हैं। (44 एनडीए के 2 साल के कार्यकाल में और 37 यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में)। कोल्‍ड चेन परियोजना के जरिये हमने कोल्‍ड स्‍टोरेज की क्षमता में 1.2 लाख मीट्रिक टन, 53.05 मीट्रिक टन प्रति घंटा क्विक फ्रीज (आईक्‍यूएफ), 19 लाख मीट्रिक टन दूध का प्रसंस्‍करण और 240 रीफर वैन में वृद्धि हुई है।

श्रीम‍ती बादल ने कहा कि खाद्य प्रसंस्‍करण रोजगारोन्‍मुखी सेक्‍टर है। इसमें निवेश की सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए विदेशी और घरेलू निवेशकों हेतु एकल खिड़की सुविधा प्रकोष्‍ठ बनाया गया है। देश में कृषि एवं बागवानी उत्‍पादों की कमी और अधिकता की एक फूडमैप की पहचान की गई है जो मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है।

नाबार्ड द्वारा 2000 करोड़ रुपये का एक विशेष कोष निदृष्‍ट फूड पार्कों में कृषि प्रसंस्‍करण इकाइयों की स्‍थापना के लिए रियायती कर्ज के लिए बनाया गया है। उन्‍होंने घोषण की कि मंत्रालय किसानों को सूचना देने तथा उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्‍करण इकाई स्‍थापित करने के लिए मोबाइल आधारित वन स्‍टोप एप की शुरुआत करेगा।

कर प्रोत्‍साहन के बारे में श्रीमती बादल ने बताया कि प्रसंस्‍करण इकाइयों के लिए उत्‍पाद शुल्‍क में 10 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया है। फलों और सब्जियों की प्री कोल्‍ड स्‍टोरेज सेवाओं जैसे प्री कंशनिंग,प्री कूलिंग,रिपेलनंग और वैक्सिंग, लेबलिंग आदि सेवाओं को सेवा कर से मुक्‍त कर दिया गया है।

खाद्य एवं कृषि आधारित प्रसंस्‍करण इकाइयों तथ कोल्‍ड चेन को 100 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए कृषि के प्राथमिक सेक्‍टर में रखा गया है। मानव हस्‍तक्षेप रोकने और पारदर्शिता में सुधार लाने के लिए मंत्रालय ने अग्रणी मेगा फूड पार्क और कोल्‍ड चेन योजना के तहत की ऑनलाइन सिस्टम की शुरूआत की है। मंत्रालय ने प्रमोटरों की शिकायत निवारण प्रणाली की शुरूआत की है। साथ ही प्रक्रियाओं का सरलीकरण दस्‍तावेजों और शपथ पत्रों की जरूरतों को कम करके किया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सितंबर 2015 से अब तक 24084 लोगों को खाद्य प्रसंस्‍करण सेक्‍टर में प्रशिक्षण दिया गया है।

मंत्री ने खुलासा किया कि उनका अगला लक्ष्‍य लघु और मध्‍यम मंझौले उद्योगों की स्‍थापना करना है। इसके लिए उन्‍होंने 'संपदा' नामक एक नई योजना की शुरूआत की है जिससे अधिक पैदावार वाले क्षेत्रों के आसपास कृषि प्रसंस्‍करण संकुलों के निर्बाध विकास पर ध्‍यान देगी। खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्रालय के इन सभी पहलों से किसानों की आय को दोगुना करने तथा अपशिष्‍ट को कम करने में बहुत मदद मिलेगी।

 साभार वन इंडिया