Error message

  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).

कृषि और किसानों की मुस्कुराहट का आएगा नया दौर

कृषि और किसानों की मुस्कुराहट का आएगा नया दौर

निःसन्देह वर्ष 2017 कृषि संकट का वर्ष रहा। देश के कई राज्यों में मौसम की मार से जूझते किसानों ने लाभकारी मूल्य पाने के लिये आन्दोलन किए, वहीं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों ने किसानों के हजारों करोड़ रुपए के ऋण माफ किए। बीते वर्ष किसानों को मिली निराशाओं और चिन्ताओं को ध्यान में रखते हुए नए वर्ष 2018 में केन्द्र सरकार कृषि व किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती दिखेगी।

कृषि सम्बन्धी आँकड़ों को देखें तो पाते हैं कि बीते वर्ष कृषि विकास दर करीब 4 फीसदी रही, जबकि 2016 में यह 5 फीसदी थी। वर्ष 2014 में कृषि निर्यात 43 अरब डॉलर था, 2017 में घटकर करीब 33 अरब डॉलर रह गया। जीडीपी में कृषि का योगदान 2013-14 में 18.2 फीसदी था, वह 2016-17 में घटकर 17.4 फीसदी रह गया। इसके चलते नीति आयोग ने समीक्षा की कि देश में 80 फीसदी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था से बाहर हैं।

केन्द्र सरकार ने भी संकेत दिया है कि 2018 में खेती-किसानी के हित में महत्त्वपूर्ण कदम उठाएगी। 2022 तक कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की आमदनी दोगुनी करने के लिये योजना प्रस्तुत की है। इसमें फसलों का उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और कृषि व उससे जुड़े बाजारों को सुधार प्रमुख रूप से शामिल किया गया है।

2018 में सरकार को किसानों को मुस्कुराहट देने के लिये बाजार समर्थक सुधारों की डगर पर आगे बढ़ना होगा।

1. कृषि जिंसों की कीमतों में गिरावट के समय तत्काल हस्तक्षेप के लिये राज्यों को सक्षम बनाना होगा।
2. चना, अरहर, तिलहन जैसी फसलों के दाम समर्थन मूल्य से नीचे पहुँच गए हैं। कीमतों में स्थिरता लाने को राज्यों को धन आवंटन करना होगा।
3. कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक बन्द हो, ताकि किसानों को वैश्विक स्तर पर लाभ मिल सके।
4. निर्यातोन्मुखी कृषि सामग्री के हवाई परिवहन पर जीएसटी दर 18 फीसदी से कम कर 5 फीसदी की जानी चाहिए।
5. देश में उत्पादन का मात्र 10 फीसदी हिस्सा प्रसंस्कृत होता है, इसे बढ़ाकर 15 फीसदी किया जाए।
6. किसानों की आय बढ़ाने के लिये कच्चे माल के मूल्य, उत्पाद के विपणन, जमीन के प्रबन्धन पर विशेष ध्यान देना होगा।
7. पुराने पड़ चुके अनिवार्य जिंस अधिनियम को समाप्त करना होगा।
8. घरेलू कीमतों को सीमा शुल्क से सम्बद्ध किया जाना होगा, ताकि आयात स्थानीय उपज से सस्ते न हो सकें।
9. देशभर में किसानों को समर्थन मूल्य का वास्तविक लाभ दिलाने के लिये मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री भावान्तर भुगतान योजना जैसी कोई आदर्श योजना लागू किये जाने पर विचार किया जाना चाहिए

 

डॉ. जयंतीलाल भंडारी