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आलू के प्रमुख रोग एवं उपचार

आलू के प्रमुख रोग एवं उपचार

अगेतीअंगमारी
यह रोग आल्तेरनेरिया सोलेनाई नामक फफूंदी के कारण लगता है उत्तरी भारत में इस रोग का आक्रमण शरद ऋतू के फसल पर नवम्बर में और बसंत कालीन फसल में फरवरी में होता है यह रोग कंद निर्माण से पहले ही लग सकता है निचे वाली पत्तियों पर सबसे पहले प्रकोप होता है जंहा से रोग बाद में ऊपर कि ओर बढ़ता है पत्तियों पर छोट छोटे गोल अंडाकार या कोणीय धब्बे बन जाते है जो भूरे रंग के होते है ये धब्बे सूखे एवं चटकने वाले होते है बाद में धब्बे के आकार में बृद्धि हो जाती है जो पूरी पत्ती को ढक लेती है रोगी पौधा मर जाता है .
उपचार
10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र में 2 किलो अकौआ की पत्ती 2किलो नीम की पत्ती 2किलो बेसरम की पत्ती मिलाकर 10-15 दिन तक सड़ाकर इस मूत्र को आधा शेष बचने तक उबालकर फिर इसके लीटर 1 मिश्रण को 200 लीटर पानी में मिलाकर तर बतर कर पम्प द्वारा प्रति एकड़ छिड़काव करे 
रासायनिक उपचार
बुवाई के पूर्व खोद के लिकाले गए रोगी कंदो को नष्ट्र कर देना चाहिए।
आलू के कंदो को एगेलाल के 0.1 प्रतिशत घोल में 2 मिंनट तक डुबाकर उपचारित करके बोना चाहिए।
रोग प्रतिरोधक जाति जैसे कुफरी जीवन, कुफरी सिंदूरी आदि।
फाइटोलान, ब्लिटाक्स- 50 का 0.3 प्रतिशत 12 से 15 दिन के अन्तराल में 3 बार छिड़काव करना चाहिए। आलू लगाते समय लाईवा एग्रो का महाबली 2से 5किलो एकड़ प्रयोग अवश्य करें। स्प्रे में लाईवा एग्रो का फंजी क्योर का प्रयोग करें

पछेती अंगमारी
यह रोग फाइटो पथोरा इन्फैस्तैन्स नामक फफूंदी के द्वारा होता है इस रोग में पत्तियों कि शिराओं , तानो डंठलो पर छोटे भूरे रंग के धब्बे उभर आते है जो बाद में काले पड़ जाते है और पौधे के भूरे भाग गल सड़ जाते है रोकथाम में देरी होने पर आलू के कंद भूरे बैगनी रंग में परवर्तित होने के उपरांत गलने शुरू हो जाते है .
उपचार
10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र में 2 किलो अकौआ की पत्ती 2किलो नीम की पत्ती 2किलो बेसरम की पत्ती मिलाकर 10-15 दिन तक सड़ाकर इस मूत्र को आधा शेष बचने तक उबालकर फिर इसके लीटर 1 मिश्रण को 200 लीटर पानी में मिलाकर तर बतर कर पम्प द्वारा प्रति एकड़ छिड़काव करे 
500 ग्राम लहसुन और 500 ग्राम तीखी चटपटी हरी मिर्चलेकर बारीक़ पीसकर 200 लीटर पानी में घोलकर थोडा सा शैम्पू झाग के लिए मिलाकर तर बतर कर अच्छी तरह छिड़काव प्रति एकड़ करे .
रासायनिक उपचार
बुवाई के पूर्व खोद के लिकाले गए रोगी कंदो को नष्ट्र कर देना चाहिए।
1- प्रमाणीत बीज का प्रयोग किया जाना चाहिए ।
2- रोग प्रतिरोधी जातीयों का चयन किया जाना चाहिए जैसे कुफरी अंलकार, कुफरी खासी गोरी, कुफरी ज्योती, आदि।
3- बोर्डो मिश्रण 4:4:50, कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का 0.3 प्रतिशत का छिड़काव 12-15 दिन के अन्तराल मे तीन बार किया जाना चाहिए
5 पहली स्प्रे में लाईवा एग्रो का फंजी क्योर दूसरी स्प्रे में लाईवा एग्रो का अग्निअस्त्र की स्प्रे करें।
6बुबाई से टॉप ड्रेसिंग तक लाईवा एग्रो का महाबली अवश्य प्रयोग करें
7 बुवाई से पूर्व लाईवा एग्रो का भू संजीवनी का प्रयोग करें।

काली रुसी ब्लैक स्कर्फ 
यह रोग राइजोक्टोनिया सोलेनाई नामक फफूंदी के कारण होता है इस रोग का आक्रमण मैदानी या पर्वतीय क्षेत्र में होता है रोगी कंदों प़र चाकलेटी रंग के उठे हुए धब्बो का निर्माण हो जाता है जो धोने से साफ नहीं होते है है इस फफूंदी का प्रकोप बुवाई के बाद आरम्भ होता है जिससे कंद मर जाते है और पौधे दूर दूर दिखाई पड़ते है .
उपचार
10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र में 2 किलो अकौआ की पत्ती 2किलो नीम की पत्ती 2किलो बेसरम की पत्ती मिलाकर 10-15 दिन तक सड़ाकर इस मूत्र को आधा शेष बचने तक उबालकर फिर इसके लीटर 1 मिश्रण को 200 लीटर पानी में मिलाकर तर बतर कर पम्प द्वारा प्रति एकड़ छिड़काव करे

भूमि जनित बीमारी जड़ सडन रोग , दीमक आदि के लिए अरंडी कि खली और नीम खाद अपने खेतो में प्रयोग करे 
लाईवा एग्रो का भू संजीवनी का प्रयोग बबाई से पूर्व वी जमाव के समय करे।
बुबाई में लाईवा एग्रो का महाबली व टॉप ड्रेसिंग में लाईवा एग्रो का बलवान का प्रयोग करें।
प्रमाणीत बीज का प्रयोग किया जाना चाहिए ।
बुवाई के पूर्व खोद के लिकाले गए रोगी कंदो को नष्ट्र कर देना चाहिए।
 बीज को आरगेनोमरक्यूरीयल जैसे इमेशान या एगालाल धोल के 0.25 प्रतिशत धोल मे 5 मिनट तक उपचारीत करें।

काला मस्सा रोग (Black wart disease)

यह रोंग फफूंद की वजह से होता है। इस रोग के प्रमुख लक्षण पौधो कंदो पर पर दिखाई पड़ता हैं। जिसमे भूरे से काले रंग के मस्सो की तरह उभार दिखाई देते है जिससे कंद खाने योग्य नही रह जाता हैं।
उपचार
10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र में 2 किलो अकौआ की पत्ती 2किलो नीम की पत्ती 2किलो बेसरम की पत्ती मिलाकर 10-15 दिन तक सड़ाकर इस मूत्र को आधा शेष बचने तक उबालकर फिर इसके लीटर 1 मिश्रण को 200 लीटर पानी में मिलाकर तर बतर कर पम्प द्वारा प्रति एकड़ छिड़काव करे

रासायनिक उपचार
 प्रमाणीत बीज का प्रयोग किया जाना चाहिए ।
 बुवाई के पूर्व खोद के लिकाले गए रोगी कंदो को जलाकर नश्ट कर देना चाहिए।
प्रतिरोधक जातियो का प्रयोग किया जाना चाहिए।
लाईवा एग्रो का भू संजीवनी का प्रयोग बबाई से पूर्व वी जमाव के समय करे।
बुबाई में लाईवा एग्रो का महाबली व टॉप ड्रेसिंग में लाईवा एग्रो का बलवान का प्रयोग करें।

organic farming: 
जैविक खेती: