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गाय की महत्ता कृर्षि प्रधान देश का किसान ही जाने

भारत के परिपेक्ष्य में गाय के महत्व 
भारत किसानों का देश है, भारत गावों का देश है | आज भी भारत की करीब ७०% जनता गावों में रहती है और खेती पर निर्भर है | खेती के लिए कुछ चीजें बहुत जरुरी होती हैं जैसे खाद, खेत की जुताई और खाने के लिए सस्ता पर पौष्टिक खाना | पर आज की दिन दुनी रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ रही महंगाई के वजह से खेती करना एवरेस्ट चढ़ने के समान हो गया है |
किसानो के पास जुताई के लिए पैसे नहीं है | किसानो के पास खेत में खाद डालने के पैसे नहीं हैं | किसानो को खाने के लिए भी सोचना पड़ रहा है क्युकी उनके पास सब्जी खरीदने की कूबत नहीं है और आज भी बहुत से किसान रोटी और प्याज खा कर ही अपना और अपनों का जीवनयापन करने को बाध्य हैं | जलावन के लिए लकड़ी की जगह गोबर के उपले उपयोग में आते थे जिससे गाँव की हरियाली भी बची रहती थी| जबकि कुछ समय पहले यही बात नहीं थी |
कुछ समय पहले गाँव में गाय और बैल हुआ करते थे साथ भैंस भी | इन चौपायों के होने के वजह से किसानी करना बहुत आसान हो जाता था क्योंकि इन चौपायों के गोबर को एक जगह इकठ्ठा कर उसे खाद बनाया जाता था और उसे खेतो में डाला था | ये वैज्ञानिक पद्धति से भी माना हुआ है की चौपायों खास तौर पर गाय का गोबर एक बहुत ही बढिया जैविक खाद होता है | पर आज वो जैविक खाद कहीं भी देखने को मिल नहीं रहा है और साथ ही रासायनिक खादों के दाम असमान को छू रहे हैं और पहले से दूसरे फसल में ही खाद का दोगुना दाम बढ़ रहा है जिस वजह से किसानों के लिए खेती करना बहुत मुश्किल भरा हो रहा है और इस कारण किसान सामूहिक ख़ुदकुशी कर रहे हैं |
साथ ही खेत को जोतने के लिए हाथ से चलाने वाले हल होते थे जिनको बैलो की सहायता से खेतो को जोता जाता था | पर आज गाय के न होने के वजह से बैल भी नहीं हैं किसानो के पास और ट्रैक्टर से जुताई करनी पड़ती है खेतों की पर हर दिन बढ़ रहे पेट्रोलियम पदार्थों के दाम के चलते और बाकि की चीजो के बढ़ते दामों के चलते खेत की जुताई कराना किसानो के बूते से बहार होता जा रहा है | आज बहुत से खेतों की जुताई नहीं हो रही बल्कि फावड़े और कुदाल से खेतों की कुदाई होती है जो खेतों की शक्ति को नष्ट करते हैं |
इसके अलावा किसानो को सब्जी खरीदने की जरुरत नहीं होती थी क्युकी जहाँ कहीं भी चौपायों के गोबर को इकठ्ठा किया जाता था उसके आस पास की मिटटी इतनी उपजाऊ हो जाती थी की वहीँ किसानो के उपयोग लायक सब्जी उत्पादित हो जाती थी | और अगर कभी सब्जी कम पड़ रही होती थी तो गाय या भैंस का दूध होता था उस कमी को पूरा करने के लिए | दूध की भरपूर मात्रा होने के चलते बच्चों में कुपोषण नहीं होता था | पर आज दूध के आभाव में जो कैलोरी चाहिए होती है बच्चों को वो नहीं मिल रही है और बच्चो में बाल मृत्यु का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है |
गाँव की हरियाली ख़तम हो रही है धीरे धीरे क्यूंकि लोगों को उपले नहीं मिल रहे हैं और वो बाध्य हैं लकड़ी को काटने के लिए | पहले लोग जो गोबर होता था उसे दो भागों में बाँट कर रखते थे पहला हिस्सा खेतों के लिए होता था खाद के रूप में और दूसरा हिस्सा होता था उपलों के लिए | पर आज तो गोबर ही नहीं मिलता है तो उपले कहाँ से मिलेंगे तो किसान लकड़ी को काटने को बाध्य हैं |
साथ ही चमड़ा व्यवसाय में भारत हमेसा चौथे या पांचवे स्थान पर रहा और कमोबेश आज भी इतने चमड़ा उत्पादन के बाद भी उसी स्थान पर है पर दुग्ध उत्पादन में भारत पहले स्थान से निचे खिसक रहा है बल्कि जिन पश्चिमी देशों पर गाय के काटने का इल्जाम लगाया जाता है वही देश गाय के दूध उत्पादन में भारत से कहीं आगे हैं | वो देश और कोई नहीं बल्कि अमेरिका ही है | आज हर दो या तिन महीने पर दूध का भारत में ही दाम बढ़ा दिया जा रहा है और साथ ही हर रोज कोई न कोई नकली दूध बनाने का कारखाना उजागर हो रहा है |
गायों की देश में घटती संख्या के चलते गायों को खरीदना किसानों के बस की बात नहीं रही| जो गाय पहले ५-१० हजार रुपयों में मिल जाती थी वही गाय अब २० हजार के ऊपर हो गईं हैं और ये चौपाया किसानो के पहुँच से बहार चला गया है | साथ ही अगर भैंसों की बात करें तो वो तो और महँगी हो गई हैं | अब उपले और जैविक खाद तो भारतीय किसान भूल चुके हैं और आयातित रासायनिक खादों को अपना खून बेच खरीदने को मजबूर हैं और गायों को कटते हुए देख रहे हैं |
क्या ये सब देख कर कोई कह सकता है कि भारत देश को किसानों का देश बनाये रखा जा सकता है या धीरे धीरे गरीबी हटाओ की जगह गरीब हटाओ पर कार्य हो रहा है | ये आप ही तय करें क्योंकि किसान की महत्ता तो आप समझते ही हैं और गाय किसान का मूलभूत जरुरत है |

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जैविक खेती: