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फूलगोभी

फूलगोभी एक स्वादिष्ट सब्ज़ी है। फूलगोभी का वानस्पतिक नाम ब्रेसिका औलीरेशिया किस्म, बोट्राइटिस है। भारतवर्ष की शीतकालीन सब्ज़ियों में से फूलगोभी प्रमुख सब्ज़ी मानी जाती है।
फूलगोभी एक लोकपिय सब्जी है। उत्त्पति स्थान साइप्रस या इटली का भूमध्यसागरीय क्षेत्र माना जाता है। भारत में इसका आगमन मुगल काल में हुआ माना जाता है। फूलगोभी का जन्म स्थान कुछ लोग साइप्रस तथा भूमध्य सागरीय क्षेत्र के आस-पास मानते हैं। डा. जेमसन सन् 1822 में इसे इंग्लैंड से लाये और कम्पनी बाग़ सहारनपुर में इसे उगाकर देखा। इसके बाद फूलगोभी देश के अन्य भागों में फैल गई। इसे सब्जी के अतिरिक्त अचार में भी इस्तेमाल किया जाता है।
भारत में इसकी कृषि के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल लगभग 3000 हेक्टर है, जिससे तकरीबन 6,85,000 टन उत्पादन होता है। उत्तर प्रदेश तथा अन्य शीतल स्थानों में इसका उत्पादन व्यपाक पैमाने पर किया जाता है। वर्तमान में इसे सभी स्थानों पर उगाया जाता है। फूलगोभी, जिसे हम सब्जी के रूप में उपयोग करते है, के पुष्प छोटे तथा घने हो जाते हैं और एक कोमल ठोस रूप निर्मित करते हैं। फूल गोभी में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ‘ए’, ‘सी’ तथा निकोटीनिक एसिड जैसे पोषक तत्व होते है। गोभी को पकाकर खाया जाता है और अचार आदि भी तैयार किया जाता है। पौध रोपण के 3 से 3½ माह में सब्जी योग्य फूल तैयार हो जाते है। फ़सल की अवधि 60 से 120 दिन की होती है। प्रति हेक्टेयर 100 से 250 क्विंटल फुल प्राप्त हो जाते है। उपज पौधे लगने के समय के ऊपर निर्भर करती है।
जलवायु
शीतल तथा नम जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। उच्च तापकृम या निम्न तापकृम तथा कम वायुमण्डलीय आद्रर्ता फूलगोभी की फसल के लिए हानिकारक सिद्ध होती है। 50 से 75º तापकृम पर फूल अच्छे विकसित होते हैं। उपजाऊ भूमि फूल गोभी के लिए उपयुक्त होती है। बलुई-दुमट-मिट्टी,जो कि उत्तम जलनिकास वाली होती है, उत्त्तम है। भूमि का पीएच मान 5.5 से 6.8 होना उपयुक्त होता है।
फ़ायदे
फूलगोभी में "सलफोराफीन" रसायन पाया जाता है जो सेहत के लिए, ख़ासकर दिल के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस रसायन की मदद से दिल को काफ़ी समय तक स्वस्थ्य रखा जाता है।
गोभी में गंधक बहुत मिलता है। कब्ज़ में रात को गोभी का रस पीने से लाभ होता है।
गोभी में क्षारीय तत्त्व होते हैं। क्षय रोगी भी इसे खायें।
गोभी खाते रहने से चर्म रोग, गैस, नाख़ून और बालों के रोग नष्ट होते हैं।

 

जुलाई में कृषि कार्यों में क्या करें

जुलाई में कृषि कार्यों में क्या करें

जुलाई महीने के प्रमुख कृषि कार्य

धनहा खेत में हरी खाद की फसल लगाते हैं। ये गहरे हल से जुताई करके किया जाता है।

धान का रोपा लगाया जाता है। जो धान जून के अन्त में बोयी गयी थी, उसकी निंदाई की जाती है।

मक्का, जो मई या जून में बोई गयी थी, उसकी निंदाइ की जाती है।

इस महीने में फिर से मक्का बाजरा, ज्वार, अरहर आदि लगाते हैं।

गन्ने पर मिट्टी चढ़ायी जाती है। कपास, मूंगफली की निंदाई-गुड़ाई करते हैं।

सूरजमुखी की बुवाई करना शूरु हो जाता है।

चारे के लिये सूडान घास, मक्का, नेथियर, रोड्स पारा आदि घास लगायी जाती है।