ग्रीन हाउस में तैयार की खीरा ककड़ी

  फलों की उचित वृध्दि व विकास के लिए 15-20 डिग्री से.ग्रे. का तापक्रम उचित होता है। खरबूजा व तरबूज की अपेक्षा खीरे को कम तापक्रम की आवष्यकता पड़ती है। आजकल विदेशों मे उपलब्ध किस्मों को सर्दी के मौसम मे भी ग्रीनहाउस या पोलीहाउस मे सफलता पूर्वक उगाया जा सकता है। इस प्रकार के ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस को ठण्डा या गर्म करने के आवष्यकता नही होती है तथा इस प्रकार के प्राकृतिक वायु संवाहित ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में एक वर्ष मे खीरे की तीन फसले पैदा करके अत्यधिक लाभ लिया जा सकता है। यह तकनीकी बड़ी व मध्यम जनसंख्या वाले षहरो के चारों ओर खेती करने वाले कृषको के लिये बहुत लाभकारी व उपयोगी प्रमाणित हो सकती है।

45 दिन में फसल तैयार

खीरा ककड़ी की बुवाई के लिए क्यारी बना कर इसमें बीज बोये जाते हैं। हाथ से बुवाई के बाद बूंद-बूंद सिंचाई से इसे सिंचा जाता है। चार से पांच दिन में बीज अंकुरण होता है। इसके बाद पखवाड़े में तंतु निकलने शुरू होते हैं।

इन तंतु को धोगे (डोरी) से ऊपर लगी जाली से बांधना पड़ता है, जिससे बेल सीधी ऊपर की ओर बढ़े। इसके बढऩे व फूल- फल लगने पर तीन-चार स्थानों पर क्लिप लगाने पड़ते है।

45 दिन में उत्पादन मिलना शुरू होता है और 55 दिन तक पैदावार मिलती है। एक पैदावार के बाद बेल को उखाड़ कर नए सिरे से बुवाई करनी होती है।

भरपूर आवक, अच्छी खपत

उद्यमी के अनुसार गर्मी में नेट हाउस तथा वर्षा, सर्दी में ग्रीन हाउस में खेती करना उपयुक्त होता है। नेट हाउस में खड़ी फसल को हवा मिलने पर वह जलती नहीं है जबकि ग्रीन हाउस में खेती करने पर मौसम की मार से फसल खराब नहीं होती।

गिनती से बिकते बीज

खीरा ककड़ी के बीज तुलाई से नहीं गिनती से बिकते हैं। एक हजार बीज की कीमत सात हजार रुपए है। एक तरफ जहां ककड़ी से भी कमाई हो जाती है तो दूसरी ओर बीज से भी मुनाफा मिल जाता है।

भरपूर मांग, किसान खुश

खीरा ककड़ी की बुवाई के बाद नियमित सिंचाई और दवा के छिड़काव की जरूरत रहती है। एक ककड़ी करीब दो सौ ग्राम की होती है।

इसकी बालोतरा, सिवाना के बाजार में भरपूर मांग है। अब आसपास के किसान भी इसकी बुवाई को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। किसान इस प्रयोग से सफल रहने पर खुश है।

आधुनिक पद्धति, अच्छी आमदनी

कृषि क्षेत्र में ग्रीन व नेट हाउस पद्धति सबसे आधुनिक पद्धति है। ऑफ सीजन में फूल व सब्जियां तैयार करने की यह पद्धति सबसे उपयुक्त है।

 

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