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झींगा मछली पालन

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झींगा

मत्स्यपालन देश में आर्थिक रूप से पिछड़े अंतर्देशीय एवं समुद्री आबादी के एक बड़े वर्ग के लिए आजीविका का मुख्य स्रोत है। यह उपलब्ध जल स्रोतों के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता के माध्यम से संभव हो सका है और यही कारण है कि यह वर्तमान में आय और रोजगार निर्माण का एक शक्तिशाली जरिया बन गया है। 

लाभकारी है यह मछली

 

मत्स्य रोग, लक्षण एवं उनका निदान

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मत्स्य रोग

सैपरोलगनियोसिस
लक्षण :- 
शरीर पर रूई के गोल की भांति सफेदी लिए भूरे रंग के गुच्छे उग जाते हैं।
उपचार :- 3 प्रतिशत साधारण नमक घोल या कॉपर सल्फेट के 1:2000 सान्द्रता वाले घोल में 1:1000 पोटेशियम के घोल में 1-5 मिनट तक डुबाना छोटे तालाबों को एक ग्राम मैलाकाइट ग्रीन को 5-10 मी० पानी की दर प्रभावकारी है।
 

मत्स्य में जीवाणु जनित रोग एवं उनका उपचार

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मत्स्य में जीवाणु जनित रोग एवं उनका उपचार

मत्स्य पालन करते समय मछलियों को होने वाले रोगों की ओर ध्यान देना आवश्यक होता है। मछलियाँ भी अन्य प्राणियों के समान प्रतिकूल वातावारण में रोगग्रस्त हो जाती है। रोग फैलते ही संचित मछलियों के स्वभाव में प्रत्यक्ष रुप से अंतर आ जाता है। फिर भी साधारणत: मछलियाँ रोग-व्याधि से लडऩे में पूर्णत: सक्षम होती हैं।
रोगग्रस्त मछलियों के लक्षण
– अनियंत्रित तैरती हैं। तथा उनकी बेचैनी बढ जाती है।
– मछली के शरीर का रंग धूमिल पड़ जाता है। चमक में कमी हो जाती है तथा शरीर पर श्लेष्मिक द्रव के स्त्राव से शरीर चिपचिपा और चिकना हो जाता है।

मत्स्य पालन तकनीक

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मत्स्य पालन

जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि के परिणाम स्वरूप रोजी-रोटी की समस्या के समाधान के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आज के विकास-शील युग में ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाय जिनके माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन के साथ-साथ भूमिहीनों, निर्धनों, बेरोजगारों, मछुआरों आदि के लिये रोजगार के साधनों का सृजन भी हो सके। उत्तर प्रदेश एक अर्न्तस्थलीय प्रदेश है जहाँ मत्स्य पालन और मत्स्य पालन और मत्स्य उत्पादन की दृष्टि से सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों में तालाबों व पोखरों के रूप में तमाम मूल्यवान जल सम्पदा उपलब्ध है। मछली पालन का व्यवसाय नि:सन्देह उत्तम भोजन और आय का उत्तम साधन समझा जाने लगा है तथा इस

मत्स्य पालन है बेहतर कमाई

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मत्स्य पालन

वर्तमान में मत्स्य पालन क्षेत्र में युवाओं के लिए तेजी से करियर के अवसर हैं। मत्स्य पालन ने अब संगठित इंडस्ट्री का रूप ले लिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियां लाभ ‍की संभावनाओं को देखते हुए इस ओर कदम बढ़ा रही हैं। इस क्षेत्र में करियर की अच्छी संभावनाएं हैं। 

मत्स्य पालन में करियर बनाने लिए बैचलर ऑफ साइंस इन फिशरीज (बीएफएससी) करना होता है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा बायोलॉजी विषय के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके मस्त्य पालन से संबंधित छोटी अवधि के कुछ कोर्स भी हैं।