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बकरी में लगने वाले रोगों की पहचान एवं उपचार

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बकरी में लगने वाले रोगों  की पहचान एवं उपचार

फड़किया रोग- इस रोग से ग्रसित बकरियां अचानक सुस्त तथा कमजोर हो जाती हैं। उनका पेट फूल जाता हैं। और वे बेचैन होकर उनके शरीर में कंपन होते हैं वह फड़कने लगती है अत: इस रोग का नाम फड़किया रखा गया हैं। उन्हें बुखार होता हैं तथा उनको पेटदर्द होने से वह पैर पटकती रहती हैं। धीरे-धीरे वह सुस्त होकर उसकी मृत्यु हो जाती हैं। यह रोग इतनी तेजी से फैलता हैं कि इलाज के लिए वक्त नहीं मिलता और कई बकरियों की मृत्यु हो जाती हैं। टीकाकरण करना यही इस रोग का इलाज हैं।

दुधारू पशुओं का रख रखाब कैसे करें

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दुधारू पशु

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है तथा यहां पशुपालन साधारणत: कृषि का एक महत्वपूर्ण अंग है जो कि देश की अर्थव्यवस्था में मुख्य भूमिका अदा करता है। दुधारू पशुओं को मौसम की विशेषताओं जैसे गर्मी एवं सर्दी से बचाने की विशेष आवश्यकता होती है। इससे पशुओं की उत्पादन एवं प्रजनन क्षमता में गिरावट एवं बीमारी होने से बचाया जा सकता है। संकर नस्ल की गायें एवं भैंस गर्मियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती है। 

पशु का आवास कैसे बनायें ?

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पशु का आवास कैसे बनायें ?

पशु का आवास जितना अधिक स्वच्छ तथा आराम दायक होता है, पशु का स्वस्थ उतना ही अधिक ठीक रहता है जिससे वह अपनी क्षमता के अनुसार उतना ही अधिक दुग्ध उत्पादन करने में सक्षम हो सकता है| अत: दुधारू पशु के लिए साफ सुथरी तथा हवादार पशुशाला का निर्माण आवश्यक है क्योंकि इसके आभाव से पशु दुर्बल हो जाता है और उसे अनेक प्रकार के रोग लग जाते है|एक आदर्श गौशाला बनाने के लिए निम्न लिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार

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 गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार

अब गाय के पेट में से प्लास्टिक पौलिथिन निकलने के लिए पेट फाड़ने की जरूरत नहीं.. गाय के पेट से प्लास्टिक पौलिथिन को समाप्त करने का सफल उपचार किया जा सकता है पौलिथिन खाई गाय के जुगाली करते समय उसके दांतों से आवाज आती है !

उपचार इस प्रकार है सामग्रीः

100 ग्राम सरसों का तेल,

100 ग्राम तिल का तेल,

100 ग्राम नीम का तेल और

100 ग्राम अरण्डी का तेल 

कृषि क्षेत्र के तीन घटकों में महत्वपूर्ण है ‘पशुधन’

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kisanhelp.in

पिछले एक दशक के दौरान अनेक विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए पशुधन व्यवसाय ने भारतीय कृषि व अर्थ व्यवस्था में व्यापक योगदान दिया है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन भी हुआ है । इसमें निहित संभावनाओं के पूर्ण दोहन के लिए आवश्यक है कि इसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र में सम्मिलित किया जाए ।

बकरी पालन :आय का उत्तम स्रोत

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बकरी पालन

खेती और पशु दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। उत्तर प्रदेश की आजीविका इन्हीं दो के इर्द-गिर्द अधिकांशतः घूमती रहती है। खेती कम होने की दशा में लोगों की आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन हो जाता है। गरीब की गाय के नाम से मशहूर बकरी हमेशा ही आजीविका के सुरक्षित स्रोत के रूप में पहचानी जाती रही है। बकरी छोटा जानवर होने के कारण इसके रख-रखाव का खर्च भी न्यूनतम होता है। सूखे के दौरान भी इसके खाने का इंतज़ाम आसानी से हो सकता है, इसके साज-संभाल का कार्य महिलाएं एवं बच्चे भी कर सकते हैं और साथ ही आवश्यकता पड़ने पर इसे आसानी से बेचकर अपनी जरूरत भी पूरी की जा सकती है। बुंदेलखंड क्षेत्र में अधिकतर लघु एवं सीमा

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