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आम पर गुजिया कीट का खतरा

mango

 बीते दिनों हुई बारिश व तेज़ हवाओं के चलते गेहूं की फसल को तो नुकसान हुआ ही है साथ ही इसका असर बागबानी की फसल पर भी पड़ा है। बारिश की वजह से नमी के कारण मौसम गुजिया कीट के लिए अनुकूल हो गया है। इससे सबसे ज़्यादा असर आम की फसल पर पड़ेगा। बीते दिनों हुई छुट-पुट वर्षा ने आम के पेड़ों पर जमी मिट्टी को धुल दिया है ऐसे में अब पेड़ों की तना,पत्ती व बौरों पर गुजिया कीट का प्रकोप बढ़ सकता है।

मौजूदा हाल

उत्तर प्रदेश में आम की फसल की मौजूदा स्थिति पर उद्यान एवं खाद प्रसंस्करण विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक एसपी जोशी ने गाँव कनेक्शन को बताया,”प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हाल ही में हुई तेज़ बारिश और ओलावृष्टि से आम की फसल को ज़्यादा नुकसान हुआ है। इसका सबसे ज़्यादा असर प्रदेश के उन्नाव क्षेत्र में हुआ है।” वो आगे बताते हैं,”प्राकृतिक आपदाओं के अलावा वातावरण में नमी से कीटों का भी खतरा है। इसलिए आगामी दिनों को देखते हुए बागवानों को यह सलाह है कि वे बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में जैविक उपचार ही करें। रासायनिक दवाओं का उपयोग तभी करें जब कीट का संक्रमण ज़्यादा है।”

बौर को खराब कर सकते हैं कीट

बारिश के कारण वातावरण में नमी बढऩे से गुजिया कीट ज़मीन से निकलकर पेड़ों पर चढ़ जाते हैं। यह कीट सबसे पहले पत्तियों को अपना शिकार बनाते हैं फिर बौर के आते ही फसल के फूलों का रस चूस लेते हैं और बौरों को खराब कर देते हैं। यह कीट हल्के लाल व सफेद रंग के होते हैं व इनकी लंबाई दो से तीन मीमी. होती है।

कैसे करें बचाव

आम की फसल को गुजिया कीट के प्रकोप से बचाने के लिए केंद्रीय एकीकृ त नाशीजीव प्रबंधन केंद्र (सीआईपीएमसी) के पौध संरक्षण अधिकारी उमेश कुमार ने गाँव कनेक्शन को बताया,”गुजिया कीट को बढऩे से रोकने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि उसे किसी भी तरह पेड़ पर चढऩे से रोका जाए।” इस कीट के फसल के बचाव पर वो आगे बताते हैं,”गुजिया कीट से बचाव के लिए किसानों को बाग में जल्द से जल्द जुताई कर देनी चाहिए। इससे कीट के बिल नष्ट हो जाएंगे। जुताई के साथ-साथ पेड़ों की तना पर दो से ढाई फीट तक कई परत में पॉलीथीन कस कर लपेट देनी चाहिए। इससे गुजिया कीट पेड़ पर नहीं चढ़ पाएगी।” अगर कीट पेड़ के तने पर चढ़ गई हो तो चार प्रतिशत मोनोक्रोटोफास (एक मिली. एक लीटर पानी में) व डायमेथोएट 0.06 प्रतिशत (दो मिली.एक लीटर पानी में ) घोल का छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें। इसके साथ साथ आम के बौर निकलने के समय मिज कीट का प्रकोप दिखायी पड़ते ही फेनिट्रोथियान (एक मिली. प्रति लीटर पानी में) या डायमेथोएट (1.5 मिली. प्रति लीटर पानी में) घोल बनाकर छिड़काव करें।

साभार  गाँव कनेक्शन