गेहूं का रकबा 2.11 करोड़ हेक्टेयर पहुंचा

गेहूं का रकबा 2.11 करोड़ हेक्टेयर पहुंचा

 सर्दी के जोर पकड़ते-पकड़ते गेहूं की बुवाई ने भी देश में गति पकड़ ली है। अभी तक (2 दिसम्बर की स्थिति में) गेहूं की बुवाई  211 लाख हेक्टेयर पार कर गई है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 200 लाख हेक्टेयर पहुंच पाई थी। वहीं दलहनी फसल में प्रमुख फसल चना भी 112.67 लाख हेक्टेयर में बोया गया है जबकि समान अवधि में गत वर्ष 108.57 लाख हेक्टेयर हो पाया था।

कृषि मंत्रालय द्वारा 2 दिसम्बर को जारी बुवाई की प्रगति के मुताबिक देश में रबी फसलों की बुवाई कुल मिलाकर 450.61 लाख हेक्टेयर हो गई है। रबी का सामान्य क्षेत्रफल 633.80 लाख हेक्टेयर आंका गया है।

पिस्ता की खेती

आवश्यक जलवायु

पिस्ता की फसल के लिए मौसम की स्थिति बेहद अहम तत्व है। पिस्ता के बादाम को दिन का तापमान 36 डिग्री सेटीग्रेड से ज्यादा चाहिए। वहीं, ठंड के महीने में 7 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उनके शिथिल अवधि के लिए पर्याप्त है। इसके पेड़ ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर ठंडे तापमान की वजह से अच्छी तरह बढ़ नहीं पाते हैं। भारत में पिस्ता के नट्स यानी बादाम को बढ़ने के लिए जम्मू-कश्मीर प्राकृतिक जगह है। पिस्ता के लिए आवश्यक

मिट्टी

15500 करोड़ की हो सकती है पीएम फसल बीमा योजना

15500 करोड़ की हो सकती है पीएम फसल बीमा योजना

इस साल बाढ़, बारिश और सूखे ने किसानों को जमकर रुलाया. किसानों की करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गई. किसानो ने केंद्र और स्टेट गवर्नमेंट से राहत मांगी. केंद्र सरकार ने भी दो कदम आगे बढ़कर किसानों को आर्थिक कंपनसेशन दिया. नया साल आने वाला है. आगामी बजट वर्ष 2023-24 की तैयारियां शुरू हो गई है. एग्रीकल्चर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. ऐसे में किसान भी उम्मीद भरी नजरों से आम बजट की ओर से देख रहा है. वहीं केंद्र सरकार भी किसानों को निराश नहीं करेगी. इसी क्रम में बजट को लेकर केंद्र सरकार के स्तर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. 

Pages