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मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में अब मिलेगा 1 पलेवा, 1 सिंचाई

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में अब मिलेगा 1 पलेवा, 1 सिंचाई

मंदसौर। जिले भर में बरसात कम होने का असर खरीफ के बाद अब रबी पर भी दिखेगा। जिले भर में 51 तालाबों में से 37 तालाब क्षमता से आधे ही भर पाए हैं। इनमें से अधिकांश तालाब रबी सीजन में खेतों को तर रखते थे। अब पानी की कमी को देखते हुए सिंचाई विभाग ने ही यह फैसला कर लिया है कि किसानों को एक बार पलेवा के लिए और दूसरी बार सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। इसके अलावा पानी नहीं दे पाएंगे। इस बार बरसात कम होने से लदूना, लामगरा, मूंदड़ी, चंदवासा, रनायरा जैसे बड़े तालाब तो खाली ही हैं। इससे लगभग 350 गांव के 15 हजार किसानों को रबी में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा।

पांच लाख मिट्टी के नमूने लेंने को 55 हजार गांवों में लगेगी किसान चौपाल,

पांच लाख मिट्टी के नमूने लेंने को 55 हजार गांवों में लगेगी किसान चौपाल,

किसान आत्महत्या की घटनाओं और लगातार फसल नुकसान के हालातों से निपटने के लिए राज्य सरकार अब किसान चौपाल लगाएगी। इसमें खास तौर से किसानों को मिटटी के हिसाब से फसल का चयन करने का प्रशिक्षण भी देगी । खेती में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के बाद सरकार मिट्टी बचाओ, किसान बचाओ अभियान चलाएगी। इसके लिए 55 हजार गांवों में किसान चौपाल लगाई जाएगी । 5 से 12 दिसंबर तक चलने वाले अभियान के दौरान पांच लाख मिट्टी के नमूने भी लिए जाएंगे। इनका परीक्षण कर स्वाईल हेल्थ कार्ड बनाकर किसानों को दिया जाएगा।

राजस्‍थान के एक किसान ने 1 लीटर पानी से तैयार किया पूरा पौधा

राजस्‍थान के एक किसान ने 1 लीटर पानी से तैयार किया पूरा पौधा

 राजस्थान क्या एक लीटर पानी में पूरा पौधा तैयार किया जा सकता है? सवाल सुनकर शायद आपको हैरानी होगी लेकिन सीकर जिले के एक किसान ने यह सब संभव कर दिखाया है. किसान सूंडाराम वर्मा द्वारा अपनाया गया तरीका राजस्थान जैसे सूखे प्रदेश के लिए वरदान साबित हो सकता है.

राजस्‍थान के लिए उपयोगी

सफेद मक्खी ने केंद्र सरकार को भी किया परेशान

सफेद मक्खी

"हरियाणा और पंजाब के कपास उत्पादक किसानों के लिए सिरदर्द बन चुकी सफेद मक्खी ने केंद्र सरकार को भी चक्कर में डाल दिया है। इससे होने वाले नुकसान को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखने को लेकर केंद्र सरकार असमंजस में है।इसी वजह से  अभी तक केंद्र की ओर से कोई टीम राज्यों में नहीं भेजी जा सकी है। राज्यों  को अपने प्राकृतिक आपदा कोष से किसानों के नुकसान की भरपाई करने की सलाह  दी गई है।

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