सूखा राहत में स्वराज की मांग
Submitted by Aksh on 3 April, 2016 - 07:48यह बात कई बार दोहराई जा चुकी है कि बाढ़ और सुखाङ अब असामान्य नहीं, सामान्य क्रम है. बादल, कभी भी-कहीं भी बरसने से इंकार कर सकते हैं. बादल, कम समय में ढे़र सारा बरसकर कभी किसी इलाके को डुबो भी सकते हैं. वे चाहें, तो रिमझिम फुवारों से आपको बाहर-भीतर सब तरफ तर भी कर सकते हैं; उनकी मर्जी. जब इंसान अपनी मर्जी का मािलक हो चला है, तो बादल तो हमेशा से ही आजाद और आवारा कहे जाते हैं. वे तो इसके लिए स्वतंत्र हैं हीं. भारत सरकार के वर्तमान केन्द्रीय कृषि मंत्री ने जलवायु परिवर्तन के कारण भारतीय खेती पर आसन्न, इस नई तरह के खतरे को लेकर हाल ही में चिंता व्यक्त की है.






