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निष्ठा के साथ 3 मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

निष्ठा के साथ 3 मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

किसान भाइयों जैसा की आप जानते हैं कि देश में इस समय कोविड 19 महामारी का प्रकोप चल रहा है, अतः हमें बहार निकलते समय कुछ सावधानी बरतनी है, जिससे हम खुद भी सुरक्षित रहे और महामारी के फैलाव पैर भी नियंत्रण रहे ।
*हम घर से अत्यंत अवश्यक होने पर ही निकालें ।
*घर से निकलते समय अपने मुंह की ठुडी से लेकर नाक तक मास्क लगाये या सूती रूमाल, गमछा या अन्य कपडे की ३ परत की मास्क घर पर ही बनायें और उसे लगायें ।
* मुख्य मार्ग अथवा हाईवे से होकर जाते समय अपने साथ अपना आधार कार्ड व किसान वही अवश्य अपने साथ रखें ।

ट्राइकोडर्मा

ट्राइकोडर्मा पादप रोग प्रबंधन विशेष तौर पर मृदा जनित बिमारियों के नियंत्रण के लिए बहुत की प्रभावशाली जैविक विधि है। ट्राइकोडर्मा एक कवक (फफूंद) है। यह लगभग सभी प्रकार के कृषि योग्य भूमि में पाया जाता है। ट्राइकोडर्मा का उपयोग मृदा - जनित पादप रोगों के नियंत्रण के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है।ट्राइकोडर्मा एक घुलनशील जैविक फफुंदीनाशक है जो ट्राइकोडर्मा विरडी या ट्राइकोडर्मा हरजिएनम पर आधारित है। ट्राइकोडर्मा फसलों में जड़ तथा तना गलन/सडन उकठा(फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोर्म्, स्केल रोसिया डायलेकटेमिया) जो फफूंद जनित है, में फसलों पर लाभप्रद पाया गया है। धान,गेंहू, दलहनी फसलें, गन्ना, कपास, सब्जियों

तरबूज और खरबूज की खेती में लगने वाले रोग

गर्मी बिन तरबूज और खरबूज के अधूरी सी लगाती है. तरबूज को जहाँ लोग उसके लाल रंग और मिठास के कारण तो वहीँ खरबूज को मिठास के आलावा उसके सुगन्ध के कारण भी पसन्द करते हैं और इसके बीजों की गिरी के बिना मिठाई सजी-सजाई नहीं लगती. खरबूज और तरबूज फलों के सेवन से लू दूर भागती हैं वहीँ इसके रस को नमक के साथ प्रयोग करने पर मुत्राशय में होने वाले रोगों से आराम मिलता है. इनकी 80 प्रतिशत खेती नदियों के किनारे होती है और इन्हें मुख्य रुप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा बिहार में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है.

गेहूँ कटाई के बाद फसलों के अवशेष (नरवाई) का करें सदुपयोग, बचाएं महत्वपूर्ण तत्व

गेहूँ कटाई के बाद फसलों के अवशेष (नरवाई) का करें सदुपयोग, बचाएं महत्वपूर्ण तत्व

गेहूं आदि फसलों की कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई उपरांत अधिकांश फसलों के अवशेष या नरवाई खेत में रह जाती है, जिसे जलाया नहीं जाना चाहिए। नरवाई जलाने से हमारे खेतों में मौजूद लाभदायक मित्र कीट नष्ट हो जाते है। साथ ही मिट्टी का तापक्रम बढ़ने से उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है, मिट्टी सख्त हो जाती है। फलस्वरूप जुताई करने पर अधिक मेहनत लगती है और डीजल की लागत भी बढ़ जाती है और मिट्टी की जल धारण क्षमता भी कम हो जाती है। नरवाई जलाने से मिट्टी में कार्बन की मात्रा कम हो जाती है जबकि मिट्टी के उपजाऊपन के लिए कार्बन की मात्रा होना लाभदायक होता है।

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