Error message

  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).
  • Deprecated function: Using ${var} in strings is deprecated, use {$var} instead in include_once() (line 1065 of includes/theme.inc).

आधुनिक खेती

एक वक़्त था जब किसान का ज़िक्र होते ही खेतों में कड़ी मेहनत मशक्कत करते ग़रीब मजदूरों की तस्वीर उभरती थी.

लेकिन बदलते वक़्त के साथ आम किसान भी अब आधुनिकता की दौड़ में कदम बढ़ाते नज़र आ रहे हैं. आज किसान खेती की सबसे नई तकनीक आजमा रहे हैं जिनका इस्तेमाल आसान है और खर्च भी उनके दायरे में होता है.

इन तकनीकों के इस्तेमाल से कम ज़मीन पर खेती करके किसान अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं.

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है (इससे संबंधित अभ्यास बागवानी का अध्ययन होर्टीकल्चर में किया जाता है)

खाद्य सुरक्षा का वाहक बनेगा चावलः स्वामीनाथन

खाद्य सुरक्षा का वाहक बनेगा चावलः स्वामीनाथन

चावल भविष्य का खाद्यान्न है और यही खाद्य सुरक्षा का वाहक बनेगा। यह कहना है जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के पास आराम करने का वक्त नहीं है।

उन्हें चावल की ऐसी किस्में विकसित करनी होंगी जो पर्यावरण में हो रहे बदलावों के अनुकूल हों और जिससे चावल का उत्पादन बढ़ सके। स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।

स्वामीनाथन ने कहा, "इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 1967-68 में अंतरराष्ट्रीय चावल शोध संस्थान (आइआरआरआइ) द्वारा विकसित चावल की किस्म आइआर-8 और अन्य किस्मों ने भारत में हरित क्रांति को गति दी।

आधुनिक खेती से संवर रही किसान की किस्मत

आधुनिक खेती से संवर रही किसान की किस्मत

'उत्तम खेती, मध्यम वान, अधम चाकरी भीख सामान' यह लोकयुक्ति प्रखंड के किसान 'श्री' योजना से सम्मानित कृषक उमेश चंद्र पांडेय पर सटीक बैठती है। पारंपरिक तरीके या आधुनिक पद्धति से खेती में इस किसान को महारथ हासिल है। अपनी बेहतरीन खेती के तौर-तरीके से लोहा मनवा चुका यह किसान अन्य कृषकों के लिए मिसाल है। इनके द्वारा उपजाये गये धान के ग्यारह प्रजातियों के जीनों को परीक्षण के लिए अमेरिका के कृषि शोध प्रयोगशालाओं को भेजा जा चुका है। इन्हीं कुछ योगदानों के कारण राज्य सरकार द्वारा इन्हें प्रखंड किसान 'श्री' सम्मान योजना से नवाजा गया है।