बंजर भूमि पर लहलहाई प्याज की फसल

onion

प्याज की लहलहाती फसल को देखकर प्याज उत्पादक किसान बेहद खुश है। मौसम अनुकुल रहने से उनमें इसके अच्छे उत्पादन की उम्मीद है।

प्रखंड क्षेत्र में बंजर बलुई भूमि पर कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर संवारने वाले धरहरा, नुआंव, सरौरा, लेवाड़, नया भोजपुर, पुराना भोजपुर इत्यादि दर्जनों गांवों के किसान विषम परिस्थितियों में अपनी आर्थिक दशा सुधारने में जुटे है। बंजर भूमि पर दर्जनों एकड़ खेतों में प्याज का उत्पादन कर अपनी आर्थिक दशा सुधारने में लगे है। हाड़तोड़ मेहनत से अपनी आर्थिक दशा सुधारने के साथ ही गांव की तस्वीर बदलने वाले किसान अन्य गांवों के किसानों के लिए भी प्रेरणा के स्त्रोत बने हुए है। हालांकि, सरकारी नलकूप के अभाव में किसान निजी पंपसेट से प्याज के फसल का पटवन कर रहे है। इस संबंध में किसानों का कहना है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह व जनवरी माह के बीच प्याज की रोपाई बेहतर मानी जाती है। खासकर आलू व धान के फसल की कटनी के बाद किसान प्याज की खेती करते हैं, जो आम का आम व गुठली का दाम साबित होता है। कृषि वैज्ञानिक मनोज कुमार कहते हैं कि प्याज की लहलहाती फसल पर टिड्डा कीटाणु के खतरे की सम्भावना होती है। इसकी शिकायत मिले तो डायएफएम-45 दो किग्रा एक हजार लीटर पानी के साथ घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए।