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किसानों की बढ़ रही है मुसीबत

किसानों की बढ़ रही है मुसीबत

इन दिनों किसानों की मुसीबतें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं. एक तरफ किसानों को धान का समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा है, बोनस नहीं मिल रहा है. दूसरी तरफ गेहूँ के लिए खाद और खासतौर से यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं. मध्य प्रदेश में तो कई जगह यूरिया को पुलिस निगरानी में वितरित किया जा रहा है.

बजट 2018 में किसान

बजट 2018 और किसान

नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार के 2018-19 को किसानों और ग्रामीणों का बजट बताया जा रहा है। पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली फिर प्रधानमंत्री ने बार-बार जोर देखकर कहा कि ये बजट किसानों और गांव का बजट है। हम किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करेंगे और हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देंगे।

देश की कृषि व्यवस्था फसी बड़े संकट में

देश की कृषि व्यवस्था फसी बड़े संकट में

भारत में विकास का जो प्रारूप विकसित हुआ, उसमें मनुष्य के साथ प्रत्येक जीव व् जड़ प्रकृति की आवश्यकताओं का ध्यान रखा गया था। मनुष्य के केवल भौतिक पक्ष  की ही चिंता करने की बजाए उसके सामाजिक, मानसिक और आत्मिक पक्षो की भी चिंता की गई थी। केवल  मनुष्य को सुख-सुविधाओं से लैस करने की कभी कोई योजना अपने यहां नहीं बनाई गई, इसलिए देश में एक मुहावरा प्रचलित हुआ "उत्तम खेती, मध्यम बान; निकृष्ट  चाकरी, भीख निदान" इसका अर्थ बहुत साफ़ है। नौकरी करने को अपने देश में एक मुहावरा के तौर पर लिया गया अर्थात् नौकरी को कभी महत्ता नहीं दी गई। पशु,भूमि और मनुष्य इस प्रकार पूरी प्रकृति मात्र का पोषण करने वाली खेती को

आखिर किसान ही सभी वर्ग के निशाने पर क्यों हैं ?

आखिर किसान ही सभी वर्ग के निशाने पर क्यों हैं ?

सरकार ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय में स्वीकार किया कि मुख्य रूप से नुकसान और कर्ज की वजह से पिछले चार वर्षों में लगभग 48,000 किसान अपनी ज़िन्दगी खत्म कर चुके हैं। सरकार के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों से पता चलता है कि यही प्रवृत्ति 1997-2012 के दौरान रही, इस दौरान करीब 2,50,000 किसानों ने अपना जीवन गँवाया, इस अवधि के बाद सरकार विवरण देना बंद कर दिया। खर्चों को पूरा करने के लिए किसानों को बैंकों से या स्थानीय ऋणदाताओं से अपनी फसलों को बोने के लिए उधार लेना पड़ता है। ज़्यादातर मामलों में स्थानीय ऋणदाता होते हैं जो कर्ज देते हैं। एनएसएसओ आँकड़ों के मुताबिक 52% से अधिक

भारतीय गोवंश विशेष क्यों ?

आखिर भारतीय गोवंश विशेष क्यों ?

बार बार यह सवाल उठता रहा है कि पशुपालन में गौ पालन सर्वश्रेष्ठ, उसमे भी भारतीय गौ वंश ही क्यों? आखिर हमारे देश में गौ को माता का दर्जा क्यों दिया जाता है।?क्यों सभी विशेषज्ञ भारतीय गौवंश का दूध उत्तम बताते हैं?इन सभी सवालों का जवाब मथुरा के ‘पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान’ में नेशनल ब्यूरो ऑफ जैनेटिक रिसोर्सेज, करनाल (नेशनल काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च - भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेन्द्र सदाना द्वारा एक प्रस्तुति 4 सितम्बर को दी गई। मथुरा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के सामने दी गई प्रस्तुति में डॉ.

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