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जीव-जंतु

जिस भूखंड को जलवायु जीवन के अनुकूल हो और वहाँ पर हरी-भरी वनस्पतियाँ पाई जाती हों, वहाँ पशु-पक्षी और जीव-जन्तुओं का पाया जाना एक नैसर्गिक सत्य है। किसी भी भूखंड में विचरण करने वाले पशु-पक्षी और जीव-जन्तुओं की उपस्थिति से वहाँ की जलवायु का अनुमान लगाया जा सकता है प्राणी या जंतु या जानवर 'ऐनिमेलिया' (Animalia) या मेटाज़ोआ (Metazoa) जगत के बहुकोशिकीय और सुकेंद्रिक जीवों का एक मुख्य समूह है। पैदा होने के बाद जैसे-जैसे कोई प्राणी बड़ा होता है उसकी शारीरिक योजना निर्धारित रूप से विकसित होती जाती है, हालांकि कुछ प्राणी जीवन में आगे जाकर कायान्तरण (metamorphosis) की प्रकिया से गुज़रते हैं। अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं, अर्थात अपने आप और स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं।

ज्यादातर जंतु परपोषी भी होते हैं, अर्थात वे जीने के लिए दूसरे जंतु पर निर्भर रहते हैं।

अधिकतम ज्ञात जंतु संघ 542 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन विस्फोट के दौरान जीवाश्म रिकॉर्ड में समुद्री प्रजातियों के रूप में प्रकट हुए।
 गुण
जंतुओं में कई विशेष गुण होते हैं जो उन्हें अन्य सजीव वस्तुओं से अलग करते हैं। जंतु यूकेरियोटिक और बहु कोशिकीय होते हैं,(हालाँकि मिक्सोजोआ देखें), जो उन्हें जीवाणु व अधिकांश प्रोटिस्टा से अलग करते हैं।

वे परपोषी होते हैं, सामान्यतः एक आंतरिक कक्ष में भोजन का पाचन करते हैं, यह लक्षण उन्हें पौधों व शैवाल से अलग बनाता है, (यद्यपि कुछ स्पंज प्रकाश संश्लेषण व नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सक्षम हैं) वे भी पौधों, शैवालों और कवकों से विभेदित किये जा सकते हें क्योंकि उनमें कठोर कोशिका भित्ति का अभाव होता है, सभी जंतु गतिशील होते हैं, चाहे जीवन की किसी विशेष प्रावस्था में ही क्यों न हों। अधिकतम जंतुओं में, भ्रूण एक ब्लासटुला अवस्था से होकर गुजरता है, यह जंतुओं का एक विभेदक गुण है।

अब खाद सब्सिडी मिलेंगी किसानों के खाते में

अब खाद सब्सिडी मिलेंगी किसानों के खाते में

मोदी सरकार अपने आगामी आम बजट 2020 में किसानों के खाते में खाद सब्सिडी डालने का व्यवस्था कर सकती है. यह भरोसा जताते इफको के प्रबंध निदेशक डॉ यूएस अवस्थी ने यहां फूलपुर इकाई में कहा कि इससे किसान अपनी खाद खरीदने के लिए स्वतंत्र हो जायेगा. उन्होंने कहा कि केन्द्र में मोदी सरकार द्वारा किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को 49,000 करोड़ रुपये अब तक वितरित किये जा चुके हैं. इससे साबित हो गया है कि जिन खाद पर सरकार सब्सिडी देती है, उनके लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की व्यवस्था हो सकती है.

विकास की अंधी दौड़ बिगाड़ रही है प्राकृतिक संतुलन : प्रधानमंत्री

विकास की अंधी दौड़ बिगाड़ रही है प्राकृतिक संतुलन : प्रधानमंत्री

तापमान बढ़ने से पौधों और जीव-जंतुओं के जीवन-चक्र में बदलाव आ रहा है। इसकी वजह से रोजाना 50 से डेढ़ सौ प्रजातियां खत्म हो रही हैं।  विकास की अंधी दौड़ से पैदा हुई चुनौतियों के चलते जैव प्रजातियों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे निपटने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों, नीति नियामकों और शिक्षाविदों से समुचित उपाय ढूंढने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पौष्टिकता, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जैव विविधता के संरक्षण पर चर्चा अहम हो गई है। तापमान बढ़ने से पौधों और जीव-जंतुओं के जीवन-चक्र में बदलाव आ रहा है। इसकी वजह से रोजाना 50 से डेढ़