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जैविक कृषि सुरक्षा

सीवीड खाद (समुद्री शैवाल) : फसल के लिए एक बेहतरीन हरी खाद

समुद्री खरपतवार (Seaweed), समुद्र की गहराई में स्थित शैवाल (एल्गी) हैं। समुद्र में हजारों किस्म की शैवाल (Algae) पायी जाती हैं इन्हीं शैवालों में कई छोटी मछलियाँ अपना बसेरा भी बना लेती हैं। जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत होता है सी-वीड यानि समुद्र के अंदर उगने वाली घास। इन्हीं Algae और Seaweed में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों के लिए बेहद लाभादायक होते हैं। इन्हें सुखाकर उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसे सीवीड फर्टिलाइजर कहा जाता है।

क्या है सीवीड खाद?

तीन खतरों से बचाएं गेहूं की फसल

सामान्य समय से लगाई गई गेहूं की फसल में इस समय कीट, रोग और खरपतवार का प्रकोप हो सकता है।

इस समय ज्यादातर नम पूर्वा हवा चलती है जिससे फसल में रोग व कीट प्रकोप ज्यादा रहता है। पूर्वा हवा में फसल में नमी बनी रहती है और नमी की वजह से कई तरह के कीट और रोग के पनपने की आदर्श परिस्थियां बन जाती हैं।”

हमारे किसान किसी भी कीट या रोग का प्रकोप होते ही सबसे पहले रासायनिक दवाओं की ओर भागते हैं जबकि वैज्ञानिक तरीके से कीट और रोग नियंत्रण में यह सबसे आखिरी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।”

टमाटर की बैक्टीरियल विल्ट या जीवाणु उखटा रोग

बैक्टीरियल विल्ट मिट्टी जनित जीवाणु (राल्स्टोनिआ सोलेनेसीरम) के कारण होता है । टमाटर के अलावा यह आलू, बैंगन और शिमला मिर्च में भी हमला करता है । कुल्लू घाटी में इस बीमारी का प्रकोप कम है । अगर यह रोगज़नक़ एक बार  मिट्टी में स्थापित हो जाता है तो यह नौ साल तक उस खेत में रह सकता है ।

पहचान

रोग के कारण कुछ ही दिनों में पौधे का पूरा भीतरी तंत्र कमजोर पड़ जाता है । और बाद में अचानक ही  पत्ते गिरना शुरू हो जाते हैं । ग्रसित पौधे के पत्ते बिना पीले हुए हरे ही रहते हैं ।

रोग का समय

सहफसली खेती से सुधरेगी मिट्टी की सेहत

सहफसली खेती से सुधर रही मिट्टी की सेहत
मिट्टी की उर्वरा शक्ति  और उत्पादन में चोली-दामन का संबंध है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के अनुसार ही उसकी उत्पादन क्षमता प्रभवित होती है। अगर खेतों में सहफसली कृषि की जाए तो मिट्टी की सेहत के साथ-साथ उत्पादन भी बेहतर हो जाता है।

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