जलवायु परिवर्तन का असर, नए अवतार में आएगा सेब

जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ रहा है और बर्फबारी में कमी आ रही है। ऐसे में आप जो सेब खाते हैं उसका स्वाद बदल सकता है। अब उत्पादक सेब की ऐसी किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो बदलते मौसम के अनुरूप पैदा किया जा सके।  हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कम ऊंचाई वाले इलाकों में कम ठंडक में और जल्द पकने वाली सेब के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वहीं परंपरागत सेब का उत्पादन अब अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों को स्थानांतरित हो रहा है। हिमाचल के सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष राकेश सिंह ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘कम ऊंचाई वाले 4,000 फुट तक के क्षेत्रों में परंपरागत किस्मों का उत्पादन जलवायु परिवर्तन व अचानक बदलने वाली मौसम की परिस्थितियों की वजह से मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में पिछले एक-दो साल में हम नई किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’  सिंह के पास शिमला के कोटगढ में सेबों का बागान है। उन्होंने कहा कि नई किस्मों का स्वाद भिन्न है, लेकिन ये भारतीय उपभोक्ताओं के हिसाब से अच्छी हैं।

कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि कम ठंडक वाली किस्मों मसलन ‘माइकल’, ‘ट्रापिकल ब्यूटी’, ‘स्कूलमेट’ आदि का उत्पादन किसानों के लिए अच्छा है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में केंद्रीय तापमान बागवानी संस्थान (सीआईटीएच) के निदेशक डॉ नजीर अहमद ने कहा, ‘सेब का उत्पादन धीरे-धीरे ऊंचे स्थानों की ओर स्थानांतरित होने के बीच हमें ऐसी किस्मों की जरूरत है, जो जल्दी पक सके और जिन्हें ठंडक के तापमान की कम जरूरत हो।’ मौसम के रिकार्ड को देखने के बाद पता चलता है कि अब सर्दियां पिछले दो तीन दशक की तुलना में अधिक गर्म होती हैं।

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