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केमिकल से बंजर बनती जा रही जमीन

 लैब में लिए गए मिट्टी के नमूनों के आधार पर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में अच्छी पैदावार लेने के लिए केमिकल फर्टिलाइजर, नमक और कीटनाशक दवाइयों के ज्यादा इस्तेमाल से जमीन बंजर बनती जा रही है। दनकौर इलाके के बिलासपुर कस्बे में जिले की एकमात्र मिट्टी परीक्षण लैब में करीब एक महीने पहले दादरी, बिसरख, दनकौर और जेवर ब्लॉक के करीब 8 हजार खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच ने सबको चौंका दिया है।

जैविक खाद बनाकर खत्म कर सकते हैं गाजर घास

खेतों की मेड़, गलियारों और सड़कों के किनारे बहुतायात से उगने वाली गाजर घास दुनिया की सबसे विनाशकारी और आवंछित खर पतवार है। खेती को चौपट कर रही इस घास को जानवर तक नहीं खाते हैं। इसको खत्म करने के लिए अभी तक कोई कारगर दवा भी नहीं बनाई जा सकती है, लेकिन आप इसकी जैविक खाद जरूर बना सकते हैं।

मनुष्यों और पशु दोनों को त्वचा और सांस के रोग देने वाली इस घास को जैविक खाद में तब्दील कर ना सिर्फ खुद को बचाया जा सकता है बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाया जा सकता है। खरपतवार विज्ञान अनुसंधान निदेशालय ने गाजर घास से कम्पोस्ट बनाने की विधि सुझाई है।

भिण्डी की फसल में कीटों से निपटने का जैविक तरीका

श में विभिन्न सब्जियों के बीच भिंडी बड़े पैमाने पर पैदा की जाती है। पिछले कुछ सालों से इसके उत्पादन में थोड़ी कमी आई है जिसका कारण फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों, रोगों और सूत्रकृमि में हो रही वृद्धि है। भिण्डी की नरम और कोमल प्रकृति तथा उच्च नमी के कारण इसकी खेती में कीटों व रोगों के हमले की संभावना अधिक रहती है। एक  अनुमान के अनुसार कीटों व रोगों के प्रकोप से कम से कम 35 से 40 प्रतिशत उत्पादन का नुकसान हो सकता है।भी ने भिंडी की खेती को व्यावसायिक रूप से अपनाया है। इन सभी सफल कृषकों की समस्या एक ही है जिससे इन्हें नुकसान उठाना पड़ता है, वो है भिण्डी में लगने वाले रोग व कीट।

(आइवीआरआइ) में चार दिवसीय मेले का समापन

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) में चार दिवसीय मेले का शुक्रवार को समापन हो गया। मेले में यूपी, उत्तराखंड के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू के करीब 15 हजार आए किसान आए। वह आइवीआरआइ से पशुपालन के लिए खोजी तमाम तकनीक से परिचित हुए। साथ ही खेती और पशुपालन के वैज्ञानिकों से अपनी समस्याओं का समाधान भी जाना। जाते-जाते संस्थान से तैयार किए गए करीब साढ़े छह लाख के उत्पादक खरीद ले गए।

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