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पटसन के रोग तथा रोकथाम एवं उपचार

विश्‍व में कपास के बाद पटसन दूसरी महत्वपूर्ण वानस्पतिक रेशा उत्पादक वाणिज्यिक फसल है।पटसन की खेती मुख्यतया बंगलादेश, भारत, चीन, नेपाल तथा थाईलैंड में की जाती है। भारत में पश्‍ि‍चम बंगाल, बिहार, असम इत्यादि राज्यों में पटसन कि खेती की जाती है। देश में पटसन का क्षेत्रफल 8.27 लाख हैक्टेयर है।पटसन का वानस्पतिक नाम कोरकोरस केपसुलेरिस तथा को. आलीटोरियस है जो कि स्परेमेनियोसी परिवार का सदस्य है।

श्री पद्धति (एस॰आर॰आई॰ पद्धति) से धान की खेती

देश की 70% जनसंख्या का मुख्य आहार चावल है। एक अनुमान के अनुसार देश की जनसंख्या लगभग 2% वार्षिक दर से बढ़ रही है जिसके पोषण के लिये सन 2025 तक 130 तथा सन 2050 तक 180 मिलियन टन चावल की आवश्यकता होगी। सभी फसलों एवं जीवधारियों के मध्य समान प्रतियोगिता होने के कारण इन लक्ष्यों को धान के अन्तर्गत क्षेत्रफल को बढ़ाकर प्राप्त करना सम्भव नहीं है अतः प्रति इकाई क्षेत्रफल में धान की उत्पादकता को बढ़ाकर ही इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। परम्परागत धान उत्पादन की विधि (रोपाई विधि) में वर्तमान में धान उत्पादन की लागत तथा संसाधनों की खपत तो बढ़ती जा रही है परन्तु इस विधि में एकदम से उत्पादन क्षमता को बढ़

बुबाई विधि से धान की खेती

सन 1970 से पूर्व भारत में धान की सीधी बुवाई छिटकवाँ विधि से की जाती थी परन्तु बरसात के मौसम में छिटकवाँ विधि से बोये गये धान में खरपतवार नियन्त्रण करना अत्यधिक कठिन कार्य था तथा तब खड़ी फसल में खरपतवार नियन्त्रण के लिये कोई रसायन भी उपलब्ध नहीं था। खरपतवारों की अधिकता के कारण उत्पादन बहुत कम होता था । अतः ऐसी परिस्थिति में धीरे-धीरे सभी किसान अधिक कठिन तथा अधिक खर्चीली रोपाई विधि को अपनाने लगे जिसमें खेत में पानी भरा रखकर खरपतवारों को रोका जाता है तथा भरे हुये पानी में उपयोग के लिये खरपतवारनाशी भी उपलब्ध हैं। परन्तु रोपाई विधि से एक किलोग्राम धान के उत्पादन में 3000 से 5000 लीटर पानी व्यय ह

जून माह में फसल उत्पादन हेतु सलाह

मूंग की पकी हुई फलियों की तुड़ाई कर लें तथा 70-80% फलियाँ पकने पर फसल की कटाई कर लें। उर्द की फसल पूरी पक जाने पर एक साथ कटाई करें। कटी हुई फसल को सुखाकर गहाई करें तथा एक बार पुनः दानों को अच्छी तरह साफकर, सुखाकर भंडारित करें।

खाली खेतों से मृदा नमूना लेकर मृदा परीक्षण करायें। जून की गर्मी में खेत को मिट्टी पलट हल से गहरा जोतकर मिट्टी को धूप में तपायें।

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